

महिला काव्य मंच पर मानसिंह की कविताओं का बिखरा जादू
सागर। तोमर वंश के शासक राजा मानसिंह की जयंती पर कवयित्रीयों ने अपनी खूब लेखनी चलाई, जुबां पर मीठे गीतों के साथ राजा मान सिंह तोमर के गुणों का गुणगान किया।यह सिलसिला पटल पर सुबह से शाम तक चलता रहा।
ग्वालियर राज्य को स्वर्णयुग बना देने वाले राजा मान सिंह तोमर के द्वारा कराये निर्माण कार्य आज भी दर्शनीय है। ग्वालियर के किले का निर्माण ,मान मन्दिर,गुजरी महल की नक्काशी,सहस्त्रबाहु मन्दिर, तेली का मन्दिर,दर्शकों को सदैव लुभाता रहा है, कुशल राजनीतज्ञ योद्धा उच्च कोटि के संगीतकार, दर्जनों रागों के अलावा शाष्त्रीय संगीत में सबसे सम्माननीय गायन शैली ‘ध्रुपद’ का अविष्कार भी राजा मान सिंह ने किया था। राजा मान सिंह कुशल नेतृत्व क्षमता वाले राजा थे वीर पराक्रमी योद्धा,समर्पित प्रेमी,अपने लिए खुद गीत लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे तब गाते थे। इन सब का वर्णन कवयित्रीयों ने अपनी रचनाओं में खूब किया।
सबसे पहले सुषमा खरे जबलपुर से अपनी रचना को बुंदेलखंडी भाषा में बहुत सुन्दर प्रस्तुती दी….
जनम लियो हतो उनने राजपूताने में,
राजा मानसिंह भये हते भाई सुन लो एक जमाने में
आज जयंती भये हते भाई सुन लो एक जमाने में
आज जयंती उनकी है आई
हम बुंदेलिन खो याद है भाई।।
इसी क्रम में पुष्पा मिश्रा ग्वालियर
मानसिंह एक राजवीर थे।
अनेकों युद्ध जीत लिए थे
राज काज में सब सुख थे
बारिश उनके कोई नहीं थे।।
सीता पवन चौहान ग्वालियर
सचमुच बहुत अद्भुत है
प्रेम का रूप
अनुपम अप्रितम
वो राजा था और वो ग्वालिन।।
प्रो.मीना श्रीवास्तव पुष्पांशी ग्वालियर
सरसी छंद
चौदह सौ छियासी में हुए
राजा तंवर वंश
मानसिंह वीर बहुत कहाऐ
नाम किया कुल वंश।।
डॉ निशी भदौरिया….ग्वालियर
ध्रुपद राग संगीत कला के वो पुरोधा माने जाते हैं
मृगनयनी का वो हृदय ताज कुल तोमर का मान बढ़ाते हैं।।
सुबोध चतुर्वेदी….ग्वालियर
तोमर कुल के थे वंशज
तोमर कुल की आन थे।
मान सिंह था नाम जिनका
ग्वालियर की वे शान थे।।
प्रेरणा परमार मुरैना
गौरव जिनसे ग्वालियर का
जिनसे ग्वालियर का मान
ऐसे वीर विश्व विख्यात महाराज
मानसिंह को शत-शत प्रणाम
रजिया वेगम धौलपुर
मानसिंह भूप बखूब सबके मन को भा गए।
गायें गाथा नित्य ,दुनियाँ में वो छा गए।।
जन्मे बारम्बार ,गोदी में मां भारती।
नत मस्तक होकर ,सभी उतारें आरती ।।
उमा उपाध्याय ग्वालियर
वैभव, विक्रम, वीर, प्रणेता जन्म तुम्हारा मंगल हो,
सत्य और सन्मार्ग ना चूके ,
हर्ष तुम्हारा मंगल हो।
तोमर राजवंश के शासक,
योद्धा वीर नमन तुमको।
डाक्टर चंचला दवे, सागर म प्र
तुम जन्मों,भारत में,फिर एक बार
तुम्हे नमन है सौ सौ बार।
तुम्हारा नाम लेते ही गूंजता मंगल गान है,शब्द-भाव के, विशुद्ध उपासक,मान बढ़ाया वाणी का
गीतों की चेतना से,महाशून्य चमकाया।।
डॉ राजरानी शर्मा ग्वालियर
ग्वालियर के सम्मान का रचा अतुल्य विधान
शौर्य शिरोमणि भूप मानसिंह महा सुकृत संधान
ओज तेज रस रीति का रसमय भव्य निदान
धीरललित नायक बने कला संगीत की शान ।।
ममता भदौरिया ग्वालियर
भाल से तलवार से
ऐसी इक ललकार से
दुश्मनों के बीच में
हुँकार सिंह की भर गए।।
डॉ ज्योत्स्ना सिंह ग्वालियर
मान देकर प्रेम को इस कदर दिल में बसा लिया।
एक गाँव की ग्वालिन को महारानी बना दिया।।
द्वारा डॉ चंचला दवे,सागर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा ‘ युवा प्रवर्तक ‘ के प्रधान संपादक हैं। साथ ही साहित्यिक पत्रिका ‘ मानसरोवर ‘ एवं ‘ स्वर्ण विहार ‘ के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है।

आपका सविनय आभार आदरणीय