काव्यभाषा : दिल लग गया – शैलेन्द्र गौड,अम्बेडकरनगर

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दिल लग गया

दिल लग गया देखते देखते
रात कट गई सोचते सोचते!

प्यार का झोका छुआ जो हमें
कदम बढ़ते गये रोकते रोकते!

ना जाने क्या है उस नाज़नी में
महसूस करता रहा गुजरते गुजरते!

उसके मासूम चेहरे की मुस्कान
आती रही याद हमें भुलते भुलते!

दिवाना शैलेन्द्र को समझाए कौन
हार गया घराना समझाते समझाते!

~ शैलेन्द्र गौड
बढ़ियानी खुर्द, बसखारी
अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश
मो~ 8433528367

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