काव्यभाषा : दिलदार मेरा यार -सुखविंद्र सिंह मनसीरत खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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दिलदार मेरा यार

सपना जो देखा आँखों ने साकार हो गया
दिलदार,प्यार रहमत खुदा नसीब हो गया

खुशनसीब हूँ मैं जो उनका है साथ मिला
नभ का चाँद मिल गया रहा न कोई गिला
जिन्दगी के सफर में हमसफर हो गया
दिलदार,प्यार रहमत खुदा नसीब हो गया

हुस्न ए मल्लिका की तारीफ क्या करूँ
भोली सी सूरत की तारीफ मैं कैसे करूँ
कुदरत की मूरत का मैं दीवाना हो गया
दिलदार,प्यार रहमत खुदा नसीब हो गया

मखमल सा यौवन खिले फूल कमल का
रेशमी जुल्फें हों रूप लहराती फसल का
बंजर जीवन में स्नेह का वर्षण हो गया
दिलदार,प्यार रहमत खुदा नसीब हो गया

फूल सा बदन है,स्वच्छ मोती सा तन मन
सौंदर्य की पूर्ण मूर्ति अर्पित तन मन धन
मनसीरत शुक्रिया दीदार महबूब हो गया
दिलदार मेरा प्यार रहमत नसीब हो गया

सपना जो देखा आँखों ने साकार हो गया
दिलदार,प्यार रहमत खुदा नसीब हो गया

सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)