तरकश : मौत तू एक कविता है – विनोद कुशवाहा

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मौत तू एक कविता है …

आज गुलजार साहब का जन्म दिन है । साथ ही गीतों के राजकुमार स्व. विपिन जोशी की आज पुण्य तिथि भी है । यही वजह है कि ‘ तरकश ‘ में दो दिन बाद आपसे मुलाकात हो रही है । चलिये । आगे बढ़ते हैं ।

” मौत तू एक कविता है … मुझसे एक कविता का वादा है … मिलेगी मुझको “। फिल्म ‘ आनंद ‘ में गुलज़ार साहब की इस कविता के कारण भी राजेश खन्ना हमेशा याद किये जायेंगे । हालांकि इन पंक्तियों को फिल्म में अमिताभ की आवाज में कहलवाया गया था पर काका सिर्फ इसे सुनकर अमर हो गए । उन्होंने ‘ आनंद ‘ की तरह जीवन को जिया भी । उनकी ज़िंदगी भी किसी ” पहेली ” से कम नहीं थी । कहा जाता है कि इस फिल्म को करने के बाद राजेश खन्ना के मन में एक बार आत्महत्या का विचार भी आया था । उनका अपना बंगला ‘ आशीर्वाद ‘ समुद्र के ठीक सामने था जो कभी राजेन्द्र कुमार का घर ” डिंपल ” हुआ करता था । इस घर को लेकर लोगों की सोच कुछ ठीक नहीं थी । ये घर पहले ‘ भूत – बंगला ‘ कहलाता था । मगर राजेन्द्र कुमार को ये बंगला इतना पसन्द आया था कि उन्होंने इन सब बातों को दरकिनार करते हुए इस बंगले को 60 के दशक में भारत भूषण से मात्र 60 हजार रुपयों में खरीद लिया । भाग्य देखिए कि राजेन्द्र कुमार इसी बंगले में रहते हुए जुबली कुमार कहलाये और बाद में काका भी सुपर स्टार बने । राजेश खन्ना ने राजेन्द्र कुमार से ये बंगला लगभग साढ़े तीन लाख में खरीदा था । राजेन्द्र कुमार ने बंगला बेचते समय एक ही शर्त रखी कि काका बंगला लेने के बाद उसका नाम बदल दें क्योंकि डिंपल राजेन्द्र कुमार की बेटी का नाम था । राजेश खन्ना ने भी राजेन्द्र कुमार की शर्त मानते हुए बंगले का नाम बदल दिया । नाम रखा ” आशीर्वाद ” । ये एक अलग बात है कि संयोग से उनकी जिस लड़की से शादी हुई उसका नाम भी डिंपल ही था । खैर । वैसे काका ने ये बंगला इसलिये खरीदा था क्योंकि ये ‘ सी फेसिंग ‘ था । तो एक रात काका आत्महत्या के इरादे से घुटनों तक पानी में चले गए लेकिन जाने क्या सोचकर अंतिम क्षणों में उन्होंने अपना इरादा बदल दिया । सच तो ये है कि राजेश खन्ना को ” आनंद ” के किरदार से बाहर आने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी । जैसे – तैसे वे सफल हुए भी तो उनको फिर अपनी अगली फिल्म ‘ सफर ‘ में लगभग वैसा ही किरदार निभाना पड़ा । रही बंगले की बात तो उनके परिजनों ने ” आशीर्वाद ” मेंगलुरु के एक व्यवसायी शशिकिरण शेट्टी को 90 करोड़ में बेच दिया । वे इसे तुड़वा कर यहां एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनवायेंगे जबकि अंजु महेन्द्रू सहित काका के सभी फैन ये चाहते थे कि राजेश खन्ना की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए ‘आशीर्वाद ‘ को एक म्यूजियम में परिवर्तित कर दिया जाए पर ये हो न सका । अफसोस कि एक सुपर स्टार अस्त हो गया । डूब गया । यादों में । स्मृतियों में ।

“आनंद ” की स्टार कास्ट तय करते समय हृषिकेश मुखर्जी ने राजकपूर , किशोर कुमार , शशि कपूर , महमूद आदि कितने ही नामों पर विचार किया था । काका को खुद लगता था कि ‘ आनंद ‘ चल नहीं पाएगी मगर फिल्म चली भी और बेहद पसंद भी की गई । साथ ही पसन्द किया गया एक नौजवान कलाकार अमिताभ बच्चन जिसने राजेश खन्ना के स्टारडम का डटकर मुकाबला किया । जब काका और उनकी करीबी पत्रकार मित्र देवयानी चौबल ” आनंद ” देखकर बाहर निकले तभी देवयानी ने उनको चेतावनी भरे अंदाज में कह दिया था – ‘ काका इस नए लड़के से सावधान रहना ‘ । मगर काका तो काका ही थे । वे भला किसी की क्यों सुनने चले क्योंकि ऊपर आका थे और नीचे काका । चलिये वापस लौटते हैं कविता की तरह । अमिताभ बच्चन ने कभी किसी कार्यक्रम में इस कविता को नहीं दोहराया । उनकी सुई तो दो ही जगह अटकती है । ” तुम होतीं तो ऐसा होता ” या ‘ अग्निपथ ‘ ।

फिल्मों की बात करने का जरा भी मन नहीं था लेकिन संदर्भ ही कुछ ऐसा था कि इतना सब कहना – सुनना पड़ा । ” मौत तू एक कविता है “। गुलज़ार साहब की कविता की ये पंक्तियां कई दिनों से मेरे ज़ेहन में गूंज रही हैं । एक ओर कोरोना तो दूसरी तरफ कोरोना से हो रही मौतों की खबर हैरान – परेशान किये हुए है । उसके अलावा पिछले कुछ सालों से लगभग हर क्षेत्र से दुखद समाचार मिलने का एक दौर सा चल रहा है ।

राजनीति के क्षेत्र में हुई मौतों से आई रिक्तता की भरपाई तो असम्भव लगती है । विशेषकर भा ज पा को तगड़ा झटका लगा है । अटलबिहारी वाजपेयी , सुषमा स्वराज , अरुण जेटली , मनोहर पर्रिकर , अनन्त कुमार , लालजी टण्डन , कैलाश जोशी आदि कितने ही ऐसे नाम हैं जिनकी अनुपस्थिति से उपजा शून्य भाजपा कैसे भर पायेगी ये एक विचारणीय प्रश्न है । इधर सपा के पूर्व महासचिव अमर सिंह भी नहीं रहे ।

बॉलीवुड से आने वाली खबरें भी कोई सुखद नहीं हैं । इरफान खान , ऋषि कपूर , सुशांत सिंह राजपूत आदि की असामयिक मृत्यु से बॉलीवुड सम्हल भी नहीं पाया था कि संजय दत्त भी कैंसर ग्रस्त बता दिए गए । सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु को लेकर उत्पन्न विवादों में महेश भट्ट का नाम सामने आने के बाद संजू बाबा की आने वाली फिल्म ‘ सड़क 2 ‘ को तो जैसे ग्रहण लग गया है । जहां नाट्य जगत में इब्राहिम अलका जी का जाना किसी सदमे से कम नहीं था तो संगीत जगत से कल मिली खबर से तो समूचा संगीत संसार ही शोक में डूब गया क्योंकि शास्त्रीय संगीत के भीष्म पितामह पं जसराज नहीं रहे । मशहूर शायर राहत इंदौरी भी कोरोना से हुई जंग में आखिरकार हार गए । जनाब राहत इंदौरी का जाना साहित्य जगत में एक अपूरणीय क्षति है । इधर खेल जगत से आने वाले समाचारों ने भी कम दुख नहीं पहुंचाया है । महेन्द्र सिंह धोनी और सुरेश रैना दोनों ने एक ही दिन क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की तो उधर पूर्व सलामी बल्लेबाज चेतन चौहान की कोरोना से मृत्यु हो गई ।

इटारसी का ज़िक्र आते ही आंसू छलछला आते हैं । हितेष पुरकर , हेमंत चौरे , हितेष तिवारी , पीयूष जैन , संतोष मालवीय ” प्रेमी ” , दर्शन तिवारी , संतोष शुक्ला , आशु तिवारी , डॉ अनीस मोलासरिया , आशीष गोठी , रविशंकर पांडे , अश्वनी तिवारी , सदन सिंह , सुरेश दुबे , डॉ दीपक जैन , बी के नन्दवानी मिट्ठू भैय्या , राजेन्द्र पांडे , डॉ यू के शुक्ला , भास्कर राव परांजपे , एस सी जोशी , सतीश गोठी , पाली बतरा , संतोष भंडारी , डॉ एन एल हेडा , प्रभात खंडेलवाल , देवेन्द्र जैन , सलीम भाई जैसे कितने ही अपनों को हमने बीते कुछ वर्षों में खोया है । ऐसे में गुलज़ार साहब की कविता याद आना स्वभाविक है । ‘ मौत तू एक कविता है … मुझसे एक कविता का वादा है … मिलेगी मुझको ‘।

4 COMMENTS

  1. विनोद भाई को इस लेख के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत अच्छा लेख है बहुत कुछ जानने को मिला विनोद भाई मूलतः कहानीकार है बीच में ही विषय से भटक जाते हैं लेकिन सूत्र को फिर ऐसा पकड़ते हैं कि पाठक को विषयांतर का पता ही नहीं चलता और वह उनके लेखन के जादुई सम्मोहन में खो जाता है

    • एक कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़ने में विषयान्तर तो हो ही जाता है विपिन भाई । या कभी कुछ भुला हुआ याद आ जाता है तो उसे जोड़ने के प्रयास में भी विषयान्तर सम्भव है । आप की दृष्टि पैनी है । फिर आप एक कुशल संपादक की नज़र भी रखते हैं । इसलिये आप से कुछ छिपा रहना मुश्किल है ।

  2. कुशवाहा जी कलम के धनी हैं। मौत तू कविता है सुनकर काका बाबू ही यआद आते हैं। सूचनाएं तो दुखभरी हैं रर माहौल ही ऐसा है। बस यही प्रार्थना है ईश्वर से कि इस माहौल को फिर से सुखद माहौल में बदले।

    • आदरणीय सिंह साहब आभारी हूं आपका । ये आपका बड़प्पन है जो ऐसा कह रहे हैं । प्रतिक्रिया के लिये शुक्रिया ।

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