काव्यभाषा : नई सुबह -डॉ.अखिलेश्वर तिवारी पटना

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नई सुबह

नये चाय की चुस्की ने जन्नत की फिजाँ को बदल दिया।
दशकों से बन्धन में कराहती रही आत्मा को मुक्ति दे दिया।

वाल्दैन का असली बेटा है पहले हीं जन्म में कुछ कर दिया।
35A क्या, 370 क्या सब की ऐसी तैसी देशहित में कर दिया।

70 सालों तक एक लँगड़ा कानून ने जन्नत को लँगड़ा बना दिया।
उसके सर्वांगीड़ विकास को जैसे बिल्कुल रोक कर रख दिया।

देश की रफ्तार से उसको काटकर एक नया द्वीप बना दिया।
बाहर से आये सभी लोगों का सब अधिकार विलोपित कर दिया।

एक दो खानदान के लोगों ने दस प्रतिशत वोट लेकर राज किया।
विदेशी ताकतों से समझौता कर घाटी को जहन्नुम बना दिया।

लुटती रहीं अस्मतें चिल्लाती रहीं मातायें घर भी जला दिया गया।
चार लाख से ज्यादा लोगों को मुल्क में खानाबदोश बना दिया।

एक भी आवाज नहीं उठाई गई वहाँ की सरकारों से।
मूक समर्थन मिलता रहा कश्मीर में इस देश के गद्दारों से।

सारे फर्जी सेकुलर आजतक बोल नहीं पाए अपनी जुबानों से।
विदेशी पैसों पर खिलवाड़ करते रहे देश की अस्मिता से।

डॉ.अखिलेश्वर तिवारी
पटना

1 COMMENT

  1. आदरणीय सोनी साहब को बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।

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