काव्यभाषा : ये देश मुझे प्राणों से प्यारा-सुनील कौरव गाडरवारा

Email

(देशभक्ति गीत)
“ये देश मुझे प्राणों से प्यारा”

ये देश मुझे प्राणों से प्यारा,
रज में जिसकी वीरों ने बचपन गुजारा,
कैसे लड़कर थी आजादी पाई,
प्रसू के सपूतों ने भी जान गवाई,
याद रहे इनकी अमिट कहानी,
व्यर्थ न जाने पाये इनकी कुर्बानी,

अरे फौज बन चली थी जब सुभाष की,
आँखों में भी जोत जल उठी प्रभास की,
प्रेम मातृभूमि पर जो मर-मिटने का,
आंदोलन-ही स्वर्ण-युग इतिहास का,
याद रहे इनकी अमिट कहानी,
व्यर्थ न जाने पाये इनकी कुर्बानी,

क्या बात थी उस नौजवान की,
उम्र महज कम, बात थी जबान की,
पढ़ी जीवनी लेनिन की काल-कोठरी में,
आग जल उठी अंग्रेज़ो की खोपड़ी में,
याद रहे इनकी अमिट कहानी,
व्यर्थ न जाने पाये इनकी कुर्बानी,

ये देश मुझे प्राणों से प्यारा,
रज में जिसकी वीरों ने बचपन गुजारा,
कैसे लड़कर थी आजादी पाई,
प्रसू के सपूतों ने भी जान गवाई,
याद रहे इनकी अमिट कहानी,
व्यर्थ न जाने पाये इनकी कुर्बानी।

स्वरचित मौलिक
सुनील कौरव
गाडरवारा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here