“आरंभ- अपनी बात” का ऑनलाइन आयोजन हुआ

“आरंभ- अपनी बात” का ऑनलाइन आयोजन हुआ

भोपाल। आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन एवं विश्व हिंदी संस्थान कनाडा चैप्टर मध्य प्रदेश के तत्वावधान में ” जश्न ए आजादी “के अवसर पर “आरंभ- अपनी बात”ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न वर्गों से लोग शामिल हुए और अपनी बात रखी। स्वतंत्रता प्राप्त किए हुए हमें इतने वर्ष हो गए पर सही अर्थों में जनमानस की क्या आकांक्षाएं हैं। कौन से ऐसे बाहरी और अंदरूनी तत्व है जिनसे हमें आजादी पाना है।

शोभा ठाकुर ने अपनी बात रखते हुए कहा शासन की व्यवस्था पर यह कितना बड़ा प्रश्न चिन्ह है? कि कागज पर योजनाओं का अंबार लगा होता हैं, लेकिन कितने प्रतिशत किसान , युवा, मजदूर लाभान्वित होते हैं ये किसी से छिपा नहीं है। वर्तमान समय में सामाजिक, आर्थिक, युवा व बच्चों के शैक्षणिक तथा युवाओं के उन्नयन की दिशा में सही विकासोन्मुखी योजनाओं को लागू करने की आवश्यकता हैं ।
लॉकडाउन के दौरान मजदूरों और कर्म कम आय वर्ग के लोगों को बहुत बेरोजगारी और मुसीबतों का सामना करना पड़ा है। जिसने अवसाद निराशा और आत्महत्या मैं वृद्धि की है । कोरोना लाकडाउन के कुछ फायदे भी हैं , जैसे शराबखोरी व बलात्कार की शर्मनाक घटनाओं में कुछ हद तक कमी आई हैं,जो सुखद हैं, लेकिन राजनीति की उठा पटक व दंगों में लगाम नहीं लग रही हैं!

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अनुपमा अनुश्री ने अपनी बात रखते हुए कई मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने कहा एक आजादी हमें गुलामी से, अन्याय- अत्याचार से मिली,पर अभी कई सारी ऐसी आजादी हैं जो हमें पाना है । आजादी चाहिए धर्म और प्रेम की संकीर्णता से पैरवी करने वाली सोच से। आजादी चाहिए बेईमानी, भ्रष्टाचार ,व्यभिचार से। आजादी मिले हमें ऐसे प्रशासन और व्यवस्था से जहां बुजुर्ग शासन करें और युवा सोशल साइट पर अपना समय और ऊर्जा व्यर्थ करें। युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर बहुत आवश्यक है। अपनी बात आगे रखते हुए उन्होंने कहा आजादी चाहिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था से जो डिग्रियां तो ऊंची ऊंची दे और रोजगार न दे। आजादी चाहिए ऐसी पतित सोच से जो महिलाओं को समानता का अवसर न दें, उनकी मर्यादा और इज्जत न कर सके। आजादी ऐसी न्याय व्यवस्था और कानून प्रणाली से चाहिए, जहां अपराधियों को संरक्षण दिया जाए , निर्दोष को बहुत देरी से न्याय मिले।
डा.स्वाति जैन ने दमोह से अपने विचार रखे और जिस तरह धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है उसका कड़ा विरोध किया।
वही के डी सिंह मैं नासिक से अपनी बात काव्य रूप में कहीं और स्वदेशी अपनाने और विदेशी सामान का बहिष्कार करने की बात कही।

डॉ दलजीत कौर ने चंडीगढ़ से अपनी बात रखते हुए कहा कि अपने स्वार्थ को त्याग कर ,सीमा पर देश प्रेम की धारा में बहना, अपना जीवन कुर्बान करना आसान नहीं होता है । इन सब जवानों का, शहीदों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है।कार्यक्रम में कुछ छात्र छात्राएं भी शामिल हुए जिन्होंने अपनी बात रखते हुए शिक्षा प्रणाली को और उत्कृष्ट और रोजगार की संभावनाओं को बेहतर बनाने की बात कही।

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