काव्यभाषा : मिट्टी – रेशमा त्रिपाठी प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश

मिट्टी

मैं मिट्टी में पला बड़ा,
मैं मिट्टी का जन्मा हूॅ॑ ।
मैं मर कर भी मिट्टी में जाऊं,
इसलिए मुझे हैं मिट्टी प्यारी ।।

यह मिट्टी मेरी माॅ॑ हैं ,
यह मिट्टी ही मेरी गोदी ।
इस मिट्टी में मैं सोता हूॅ॑,
इस मिट्टी में मैं रोता हूॅ॑ ।।

धूल चटाऊं तो मिट्टी का,
खून बहाऊं तो मिट्टी पर ।
करूं प्राण न्योछावर मिट्टी पर,
इसलिए पूछता हूॅ॑ मिट्टी को ।।

यह मिट्टी वही धरा हैं,
जहां पर लक्ष्मीबाई हुई ।
और तात्या, सुखदेव, वीर शिवाजी की गाथा का
डंका यहां पर बजता हैं।।

चंद आतंकी आते हैं, मिट्टी में मुझे मिलाने को
कसम मुझे हैं धरती माॅ॑ की और तिरंगे की अपने ।
मिट्टी उन्हें खिलाऊंगा, मिट्टी मैं उन्हें बनाऊंगा,
और जरूरत अगर पड़ी तो, मिट्टी की कब्र बनाऊंगा।।

वंदे मातरम जय हिंद जय भारत

रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश

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