काव्यभाषा : स्वतंत्रता दिवस -नीलम द्विवेदी रायपुर छत्तीसगढ़

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स्वतंत्रता दिवस

चलो चलें मिल के सब स्वतंत्रता दिवस मनाने को,
हर घर में, हर चौराहे में तिरंगा ध्वज लहराने को ,

याद जरा कर लें हम आज आजादी के परवानों को,
लक्ष्मी बाई, भगत सिंह जैसे कुछ वीर जवानों को,

बहुत बड़ी कीमत देकर हमने आजादी पायी है,
अपनी भारत माँ की खातिर प्राणों की भेंट चढ़ाई है,

जो सीमा पे प्रहरी बने हुए हैं,कितनी बहनों के भाई हैं,
ठंडी गर्मी सब सहते हैं, जो देश की खातिर लड़ते हैं,

नमन चलो हम आज करें भारत के इन वीर सपूतों को,
जब लहराएगा आसमान में, सबसे यही तिरंगा बोलेगा,

जो देश की खातिर मिटता है, वो मेरी बाहों में झूलेगा,
आज चलो हम प्रण करलें, भारत की शान बढाएँगे,

हम जब आपस में लड़ते हैं भारत माँ का दिल रोता है,
जो लहू जमीं पर गिरता है, उसका रंग एक ही होता है,

हिन्दू , मुस्लिम,सिख, ईसाई, इन सबका भेद मिटाएँगे,
मंदिर मस्जिद का क्या मतलब गर मन में नफऱत पालेंगे,

राम रहीम उसी को मिलते जो शुद्ध हृदय मतवाला है,
आपस मे प्रेम बढ़ाकर मिलके भारत को हमें सजाना है,

साक्षरता का पाठ पढ़ाकर सबको आत्मनिर्भर बनाना है
अपने अंदर की कमज़ोरी से अपने मन को आज स्वतंत्र करें,
होगा स्वर्ग से भी सुंदर भारत, हम आज एक ही मंत्र पढ़ें।

नीलम द्विवेदी
रायपुर छत्तीसगढ़