काव्यभाषा : तिरंगा मेरी शान -प्रतिमा मिश्रा ,जयपुर, राजस्थान

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तिरंगा मेरी शान

तू ही देश की शान है,
तू ही हमारा ईमान है।
मेरे देश के तिरंगे पर,
जान हमारी कुर्बान है।।

मिली आजादी गुलामी की जंजीरों से,
तोड़ के सारे बंधन
पावन हुआ जीवन।
मन की उमंग की लहरों में गाए, खुशियों के गीत होकर मगन,
दिल की आवाजों से
कहते रहेंगे हम हरदम।
वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्।।

प्रतिमा मिश्रा
जयपुर, राजस्थान

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