सिंधी अकादमियों के गठन और बजट बढ़ाने की उठी मांग

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सिंध स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय सिंधी समाज का वेबीनार सम्मेलन संपन्न
सिंधी अकादमियों के गठन और बजट बढ़ाने की उठी मांग

खंडवा। राष्ट्रीय सिंधी समाज द्वारा सिंध स्मृति दिवस 14 अगस्त की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय सिंधी वेबीनार सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह जानकारी देते हुए राष्ट्रीय सिंधी समाज शाखा खंडवा के जिला प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष कमल वरधानी ने की। वेबिनार में जुडे विभिन्न प्रदेशों के प्रतिनिधियों से श्री वरधानी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने अपने प्रदेश में सिंधी भाषा एवं संस्कृति के विकास के लिए शासन से सिंधी अकादमियों के गठन और बजट बढ़ाने की मांग उठाएं। राष्ट्रीय महासचिव मुकेश सचदेव और राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ लाल थदानी और बिहार सिन्धी पंचायत के नीरज जगवानी ने कहा कि भारत देश की एकता अखंडता और आजादी के लिए सिन्धी समाज ने सिंध प्रदेश के साथ साथ व्यापार और परिवार का बहुत बड़ा बलिदान दिया है। आज 75 सालों के बाद भी हमें अपनी सिंधी बोली संस्कृति, सभ्यता के सरंक्षण, संवर्धन के लिए के साथ सामाजिक, राजनैतिक अधिकारों के लिए झूझना पड़ रहा है। इस अवसर पर सिंध प्रदेश से बिछड़ने की पीड़ा को महाराष्ट्र प्रदेश की साहित्यकार इंदिरा पूनावाला और डॉ लाल थदानी ने अपनी लिखी हुई रचनाएं के माध्यम से प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय सूत्रधार और गुजरात भाजपा के कर्मठ कार्यकर्त्ता ललित अगनानी, रतन बाशानी (कांग्रेस) अहमदाबाद, ने राज्य सभा में अल्पमत भाषायी आधार पर 2 प्रतिनिधियों के मनोनयन की पैरवी की। गुल माखीजा (वडोदरा), हरीश लालवानी और मनोज कोटवानी (खण्डवा) ने सिंध के शेर अमर शहीद हेमू कालानी को नमन करते हुए कहा कि 18 साल की उम्र में फांसी पर झूलने वाले नौजवान का इतिहास किसी भी रूप में शहीद भगत सिंह से कम नहीं है। बांसवाड़ा से अनिल मेठानी और हरीश लखानी, छत्तीसगढ़ प्रदेश से शंकरलाल दानवानी, राधा राजपाल, गुरमुखदास वाधवानी ने कहा कि सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप, युटुब, ट्विटर के माध्यम से हमें राष्ट्रीय सिन्धी समाज की आवाज़ को बुलंद करना होगा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से समस्याओं के निराकरण की पहल करनी चाहिए। वेबीनार सम्मेलन में राष्ट्रीय सिंधी समाज युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार दरयानी, निर्मल मंगवानी, अशोक कालरा, शंकर मोटवानी, किशोर सैनानी, गोविंद मीरपुरी, भूमि कृपलानी इत्यादि ने भाग लिया।

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