काव्यभाषा : ये मातृभूमि का वंदन है -सुषमा दिक्षित शुक्ला,कानपुर

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ये मातृ भूमि का वन्दन है

ये मातृभूमि का वंदन है अभिनंदन है ।
हम सब तेरे रखवाले मां,
ये माँ बच्चों का बंधन है।
ये मातृभूमि का वन्दन है अभिनन्दन है ।
तेरी आन न जाने पाये ,
तुझपे जान लुटा देंगे ।
तेरे चरणों में लाकर के ,
शत्रू शीश झुका देंगे ।
ये मातृभूमि का वन्दन है अभिनंदन है ।
हम सब तेरे रखवाले मां,
ये मां बच्चों का बंधन है ।
चंदन जैसी तेरी ममता ,
है रखनी तेरी शान हमें ।
अगर जरूरत पड़ी वक्त पर,
न्योछावर है प्रान तुम्हें ।
ये मातृभूमि का वन्दन है अभिनंदन है।
हम सब तेरे रखवाले ,
मां ये मां बच्चों का बंधन है ।
मां तेरा क्रंदन असहनीय ,
ऐ! मातृभूमि तू प्यारी है ।
हम तेरे प्यारे बालक हैं,
तू हम सब की फुलवारी है ।
ये मातृभूमि का वंदन है अभिनंदन है ।
हम सब तेरे रखवाले मां ,
ये माँ बच्चों का बंधन है ।

© सुषमा दिक्षित शुक्ला
कानपुर

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