काव्यभाषा : स्वतन्त्रता दिवस -डॉ.अवधेश तिवारी “भावुक” दिल्ली

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स्वतन्त्रता दिवस

स्वतंत्रता का पर्व मनाएं,
आज़ादी का गीत सुनाएं।

लिया जन्म वीरों ने यहाँ पर
सर नत – मस्तक होता है,
उनके बलिदानों से ही तो
जन – मन चैन से सोता है।

राष्ट्र की सेवा करने खातिर
प्राणोत्सर्ग को कदम बढ़ाएं,
स्वतंत्रता का पर्व मनाएं
आज़ादी का गीत सुनाएं।

जन – गण – मन की धुन को सुनकर
झंकृत हों मन – वीणा – तार,
सब कुछ न्यौछावर करने को
राष्ट्र के प्रति रहें तैयार।

खुशहाली के फूल खिलाकर
जन – जन के मन को महकाएं,
स्वतन्त्रता का पर्व मनाएं
आज़ादी का गीत सुनाएं।

समझो सब कुछ देश को अपने
तभी स्वतंत्र रह पाओगे,
राष्ट्र बढ़ेगा उन्नति पथ पर
जग में नाम कमाओगे।

आज़ादी के वर्षगाँठ की
छटा निराली बढ़ती जाए,
स्वतंत्रता का पर्व मनाएं
आज़ादी का गीत सुनाएं।

वीर शहीदों का बलिदान
व्यर्थ नहीं जाने देंगे,
भारत माँ के सम्मानों पर
आँच नहीं आने देंगे।

स्वाधीन रहेंगे अंतिम क्षण तक
“भावुक” संग ये कसम उठाएं,
स्वतंत्रता का पर्व मनाएं
आज़ादी का गीत सुनाएं।

डॉ.अवधेश तिवारी “भावुक”
दिल्ली

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