काव्यभाषा : रिटायरमेंट -मिष्टी नवीन गोस्वामी नईदिल्ली

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रिटायरमेंट

आज मेरा आखिरी दिन है
स्कूल में
बीती बहुत सारी बातें संग संग चल रही हैं
अंदर एक खुशी फुदक रही है
तो दूसरी तरफ गम साल रहा है
दो दो जिंदगी की भागदौड़
अब नही जीनी पड़ेगी
एक ही जिंदगी जियूंगी अब,
नही भागूंगी सुबह सवेरे
हाथ मे ब्रेड का अधखाया पीस लिए
जिंदगी ठहर रही है
सारी जिंदगी दौड़ाया है जिसने।
अब जा रही हूं
आखिरी दिन
अपनी भागदौड़ वाली जिंदगी से
कुछ पल वापिस लाने
दराज में रखे थे अपने
कुछ चुनिंदा गुलाबी ख्वाब
हमसाया बन निभाती रही
अपना हर कीमती पल
वो दिन जो बेशुमार कीमती थे
दे दिए यहीं
समझौते में गुजार दिए
अपने जिंदगी के हसीन पल
मुझे उन्ही पलों को दराज से निकाल कर ले जाना है अपने साथ
कुछसाथ लेकर जाऊंगी
कुछ चिपके रह जाएंगे यहीं
मेरे पीछे से
कुर्सी ,बोर्ड,लाइब्रेरी में
सुना है मैं रिटायर हो गई हूं
क्या सच मे हम रिटायर हो पाते हैं?
जिंदगी के साथ
वो भी तब,
जब हम एक माँ,एक पत्नी,और सबसे अहम
जब एक भविष्य बनाने वाले हों
एक टीचर हों
शायद नारी जीवन का रिटायर मेन्ट नही होता
बस पदवी हट जाती है
एक तख्ती जो जीवन के हसीन लम्हो में
टंगी रही मेरे साथ ।।

मिष्टी नवीन गोस्वामी
नईदिल्ली,द्वारका

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