काव्यभाषा : गीत- सड़े इतिहास बदल दें -डा. रघुनाथ मिश्र ‘सहज कोटा , राजस्थान

गीत:
सड़े इतिहास बदल दें

लिख देँ सही बयान,सड़े इतिहास बदल देँ.
अर्थहीन- दकियानूसी, विश्वास बदल देँ.

गहरी ही होती जाती है, पटती नहीँ है खाई.
दर्द खड़ा आँगन मेँ, यौवन के, लेता अँगडाई
पैबन्दोँ पे और चलेगी, कब तक फटी रज़ाई.
उपवन कब तक और सहेँगे, मौसम की चतुराई.
खोजेँ नया विहान, अँधेरे पाख बदल देँ.
अर्थहीन- दकियानूसी, विश्वास बदल देँ.

पेट नहीँ भरता उसका क्योँ, जो भोजन उपजाता.
खून-पसीना दे मेहनतकश, क्योँ निर्धन रह जाता.
आँधी क गुस्सा क्योँ, छप्पर ही हिस्से मेँ पाता.
खूनी पंजा निर्बल पर ही, क्योँ ताक़त अज़माता.
सिसक रहे इंसान, जँगली त्रास बदल देँ.
अर्थहीन- दकियानूसी, विश्वास बदल देँ

लूट लिया क्योँ जैचन्दॉ ने अधरोँ की मुस्कान.
अरमानोँ के चमन बने, क्योँ बीहड और शमशान.
महलोँ की खातिर झोपडियाँ, होतीँ क्योँ बलिदान.
संसद से आते रहते क्योँ, हत्या के फरमान.
गहरे हुए निशान, न्याय की आस बदल देँ.
अर्थहीन- दकियानूसी, विश्वास बदल देँ.

फाके होते कहीँ, कहीँ क्योँ रोज दीवाली होती.
उम्मीदोँ की लाश यहाँ, क्योँ भरी जवानी ढोती.
बुनकर की बिटिया रानी क्योँ, लाज छिपाये रोती.
माँ बच्चोँ सँग त्रस्त भूख से, क्योँ विश पीकर सोती.
उट्ठा है तूफान, जमीँ-आकाश बदल देँ.
अर्थहीन- दकियानूसी, विश्वास बदल देँ.

लेखोँ मेँ दर्शाना होगा, फर्ज़ कलाकारोँ का.
गीतोँ मेँ गाना होगा अब, गम बेघरबारोँ का.
चित्र बनाना होगा अब से, घायल मज़दूरोँ का.
इतिहासोँ मेँ खून बहाना होगा, हत्यारोँ का.
साहस रहे जवान, ऊँघती साँस बदल देँ.
अर्थहीन-दकियानूसी, विश्वास बदल देँ.

@ डा. रघुनाथ मिश्र ‘सहज
कोटा , राजस्थान

09214313946

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