काव्यभाषा : माखन चोर -सुखविंद्र सिंह मनसीरत खेड़ी राओ वाली (कैथल)

Email

माखन चोर

नटखट और है चंचल, कान्हां माखन चोर
श्यामसुन्दर है प्रबल ,कान्हां माखन चोर

कभी हंसाता है तो कभी – कभी रुलाये
बहु रंग बदले पल पल,कान्हां माखन चोर

देवकीनंदन अपार बलशाली मायावी
असुरों हेतु महाकाल,कान्हां माखन चोर

देवकी जननी और यशोदा मैया पालक
दो दो माँओं का लाल,कान्हां माखन चोर

चोरी चोरी चुपके चुपके माखन चुराए
मटकी फोड़े गोपाल,कान्हां माखन चोर

गोपियों से होली खेले माधव बिरज में
रासलीला रचे नंदलाल,कान्हां माखन चोर

रुकमणी संग विवाह रचाया नन्दनन्दन
भगाया दुष्ट शिशुपाल,कान्हां माखन चोर

मनमोहक अदाओं पर लट्टू बृजबालाएं
फैलाया प्रेम जाल ,कान्हां माखन चोर

राधाकृष्ण की आध्यात्मिक प्रेम कहानी
मुग्ध था कन्हैयालाल,कान्हां माखन चोर

मनसीरत श्री कृष्ण जी के हरि गुण गावे
जन्माष्टमी पर्व विशाल,कान्हां माखन चोर

सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here