साहित्यिक संस्था लेख्य-मंजूषा की गद्य गोष्ठी सम्पन्न

साहित्यिक संस्था लेख्य-मंजूषा की गद्य गोष्ठी सम्पन्न

साहित्यिक संस्था लेख्य-मंजूषा की गद्य गोष्ठी 09 अगस्त 2020 को गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन सम्पन्न हुई। इस गद्य गोष्ठी की विशेषता यह रही कि इसमें सिर्फ अतिथियों ने ही अपनी दो – दो रचनाओं का पाठ किया। देश-विदेश से जुड़े 12 अतिथि साहित्यकार इसमें सम्मलित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था की अध्यक्ष विभा रानी श्रीवास्तव ने कैलिफोर्निया अमेरिका से किया। अतिथियों में सर्वप्रथम अपनी रचना का पाठ पटना के वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय भगवती प्रसाद द्विवेदी जी ने किया।
भगवती जी के बाद ,इसके बाद डॉ. अनीता राकेश ने अपने एक आलेख “समरसता : एक जीवन मंत्र” के साथ एक लघुकथा का पाठ किया।
वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार डॉ. ध्रुव कुमार ने अपनी दो रचनाओं का पाठ किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना से जो लॉकडाउन हुआ है, वह समय साहित्यकारों के लिए सबसे उत्तम समय है। इस समय सभी साहित्यकार सृजन और सृजनात्मक कार्यों में अपना पूरा समय दे सकते हैं।
दिल्ली से उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार अनिल शूर ने कहा कि साहित्यकार को जीवन के आसपास के घटनाओं के संवेदनाओं तक पहुँचना चाहिए। मानवीय मूल्यों को जानने की कोशिश करना चाहिए।
वहीं दिल्ली से दूसरे अतिथि कोरोना योद्धा रविन्द्र सिंह यादव ने कोरोना महामारी के बारे में बताते हुए कहा कि हमें इस बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी आँख, नाक और मुँह से अधिक फैलता है। इसलिए हमें मास्क और आँखों को चश्मे से ढके रहना चाहिए। और, अनावश्यक अपने हाथों को अपने चेहरे को छूने से बचना चाहिए। यह बीमारी में मरीजों के ठीक होने की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए हमें इस बीमारी से घबराना नहीं है, मिलकर सामना करना है।
इसके बाद अतिथियों में दिल्ली से ओम सपरा, करनाल हरियाणा से सतविंद्र कुमार राणा, पटना से अनिल रश्मि जी उपस्थित थे।
अतिथियों के रचना पाठ के बाद विदुषी साहित्यकार आदरणीय डॉ. अनीता राकेश ने सभी रचनाओं पर अपना विचार रखते हुए कहा कि रचना का सृजन करना और रचना का पटल या मंच पर पाठ करना दो-दो अलग चीज़े हैं। कई लोग ऐसे हैं जो बहुत अच्छा लिखते हैं लेकिन मंच पर उस रचना का सही से पाठ करने में हिचकते या घबराने लगते हैं। वैसे लोगों के लिए आज की गोष्ठी बहुत महत्वपूर्ण थी। इससे संस्था के उन सदस्यों को फायदा जरूर मिलेगा जो मंच अथवा ऑनलाइन प्लेटफार्म पर रचना पाठ करने से घबराते हैं। रचना पाठ करने समय कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पाठ करने वक़्त चेहरे पर भाव-भंगिमा रचना के अनुसार बदलते रहना चाहिए। उच्चारण का विशेष ध्यान रहना चाहिए। आवाज़ इतनी भी पतली नहीं होनी चाहिए की दूसरों को आवाज़ सुनाई ना दे।
कार्यक्रम के अंत में विभा रानी श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया की लेख्य-मंजूषा द्वारा हर माह साहित्य के विभिन्न विधाओं पर प्रतियोगिता आयोजित होती है। इसी क्रम में अगस्त माह के गद्य प्रतियोगिता का परिणाम घोषित करते हुए उन्होंने बताया कि पूनम कतरियार की रचना “जिजीविषा” प्रथम स्थान पर और राजस्थान से राजेंद्र पुरोहित की * पर रही।
विभा रानी श्रीवास्तव ने अपने उद्धबोधन के अंत में लेख्य-मंजूषा के फेसबुक पेज के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लेख्य-मंजूषा का फेसबुक पेज साहित्यक कार्यक्रम में देश के विभिन्न साहित्यकारों को फेसबुक लाइव के माध्यम से सबके सामने ला रही है। हाल ही में प्रेमचंद जयंती पर एक हफ़्ते तक लाइव सेशन का आयोजन हुआ। जल्दी ही स्वतंत्रा दिवस पर भी फेसबुक लाइव का आयोजन होने वाला है जिसमें कई साहित्यकार जुड़ेंगे।

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