तरकश: कलेक्टरों की मनमर्जी चलेगी क्या ? – विनोद कुशवाहा

कलेक्टरों की मनमर्जी चलेगी क्या ?

– विनोद कुशवाहा

म प्र में आई ए एस लॉबी शुरू से सरकार पर हॉबी रही है । कुछ ही मुख्यमंत्री हुए हैं जिन्होंने इनकी नकेल कस कर रखी । इनमें प्रमुख रूप से अर्जुन सिंह , प्रकाशचंद्र सेठी , वीरेन्द्र सकलेचा और कुछ हद तक सुंदरलाल पटवा । इनके अलावा लगभग हर मुख्यमंत्री के शासनकाल में सरकार के नाम पर आई ए एस लॉबी ने ही राज किया । इस लॉबी ने सरकार की त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू करने के मंसूबे कभी पूरे नहीं होने दिए । अन्यथा कलेक्टरों से’ लॉ एंड आर्डर ‘ के अधिकार वापस ले लिए जाने के बाद जितने भी कलेक्टर हैं वे केवल नाम के कलेक्टर रह जाते ।

यहां तक कि ये लॉबी आई पी एस लॉबी पर भी हावी रही । आई पी एस की गोपनीय चरित्रावली ( C R) लिखने का मामला हो अथवा अधिकारों में टकराव का जीत हमेशा आई ए एस लॉबी की ही हुई है । खैर ।

फिलहाल बात मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की । अपने तीसरे कार्यकाल में वे थोड़ा मुखर हुए हैं । पिछले दिनों ही उनकी केबिनेट ने सर्वसम्मति से फैसला लेते हुए कलेक्टरों से लॉक डाउन के अधिकार वापस ले लिए । या यूं कहें एक तरह से छीन लिए और कलेक्टर उनका मुंह तकते रह गए । अब कलेक्टर पूरी तरह से ” डिस्ट्रिक्ट क्राइसेस मैनेजमेंट ग्रुप ” पर निर्णय लेने के लिए निर्भर रहेंगे ।

दरअसल कतिपय कलेक्टरों ने ‘ ईद ‘और ‘ रक्षा बंधन ‘ जैसे त्यौहारों पर भी ” लॉक डाउन ” लगाकर आम आदमी और व्यापारियों को नहीं बख्शा । कलेक्टरों ने मात्र अपनी कुर्सी बचाने के लिए नागरिकों तथा व्यापारियों के साथ बेहद सख्ती का बर्ताव किया । उससे मुस्लिम भाईयों सहित हिन्दू भाई – बहनों के त्यौहार भी फीके पड़ गए । बड़े , मंझोले , छोटे व्यापारियों को हजारों लाखों का नुकसान हुआ । व्यापारियों को हुए इस नुकसान की भरपाई के लिए शासन को कलेक्टरों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना चाहिए ।

भला हो पत्रकारों का जिन्होंने कलेक्टरों के इस पक्षपात निर्णय का घोर विरोध करते हुए सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कलेक्टरों की शिकायत की । इंदौर में भा ज पा के राष्ट्रीय महासचिव एवं म प्र शासन के पूर्व केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक को कलेक्टर के फैसले के खिलाफ खड़े होना पड़ा । नाफरमानी के अंदाज में कलेक्टर फिर भी अड़े रहे । आखिरकार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मामले में हस्तक्षेप करना ही पड़ा । तब जाकर कहीं जनता को राहत मिली । अन्यथा शराब की दुकानें तो खुली रहतीं थीं पर बाजार बंद रहता था । यहां तक कि 5 अगस्त को जहां एक ओर राम लला के निर्माणाधीन मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था वहीं दूसरी ओर होशंगाबाद जिले में 5 बजे लाठी दिखाकर बाजार बंद कराए जा रहे थे । इससे बाजार सहित शहरों और गांवों में कर्फ्यू का सन्नाटा छा गया और इस तरह आम नागरिकों सहित व्यापारियों को राम मंदिर बनने की खुशी मनाने से भी वंचित कर दिया गया । कलेक्टर तो कलेक्टर एस डी एम भी बेलगाम हो गए थे । खरगौन जिले में 5 अगस्त को हिंदूवादी संगठनों के जुलूस पर पुलिस ने दिल से लाठियां भांजीं । आखिर पुलिस को लाठी चार्ज का आदेश किसने दिया ? यहां भी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से अपना विरोध दर्ज कराया । अंततः शासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए खरगौन के एस डी एम को हटा दिया । एस डी एम खुद तो नप गए पर कलेक्टर को बचा ले गए ।

हास्यास्पद तो ये है कि कलेक्टरों में ” लॉक डाउन ” लगाने की प्रतिस्पर्धा चल रही थी । बैतूल जिले में 3 दिन , होशंगाबाद जिले में चार दिन और नरसिंहपुर जिले में तो सीधे पांच दिन का ” लॉक डाउन ” लगा दिया गया । कहीं कोई एकरूपता नहीं । कलेक्टर अपनी कुर्सी बचाने के लिए मनमर्जी से ” लॉक डाउन ” लगा रहे थे । अब ये मनमर्जी नहीं चलेगी साहब् । जय हिंद ।

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