काव्यभाषा : अमर शहीद – बिन्दु त्रिपाठी भोपाल

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अमर शहीद

मरे नही तुम अमर हो गए
एक नया इतिहास रच गए
जग की है यह रीत पुरानी
जो आया वह जाएगा
आते तो हैं बहुत जगत मे
आते है और जाते भी है
लेकिन जैसे तुम जाते हो
सौभाग्य स्वरूप ही जा पाते हैं
सब जीते हैंं अपना जीवन
तुम जीते हो देश की खातिर
ईश्वर भक्ति से बढ़कर
देश भक्ति ही होती है
खुद की खातिर जीना भी क्या जीना
जीना तो वह है जो देश की खातिर जीता हो
तुम ही तो वह महान व्यक्ति हो
जो देश की खातिर जीते हो
देश की खातिर लहू बहा कर
प्राण निछावर करते हो
जब तुम ऐसा करते हो तो
मृतक नही कहलाते हो
सर्वोच्च सम्मान विभूषित हो कर
तुम शहीद कहलाते हो ।

स्व रचित

बिन्दु त्रिपाठी
भोपाल

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