शीतला सप्तमी थदड़ी पर्व कल

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सिंधी समाज की शीतला सप्तमी थदड़ी पर्व कल।
समाजजन देवीय प्रकोप की शांति हेतु मनाते हैं पर्व।

खंडवा। सभी धर्मों के कुछ विशेष त्यौहार एवं पर्व होते हैं, जिन्हें संबंधित समुदाय मनाता है। ऐसा ही सिंधी समाज का एक प्रमुख त्यौहार समाजजनों द्वारा कल सोमवार 10 अगस्त को थदड़ी पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सिंधी समुदाय पूर्व संध्या पर बनाया गया भोजन ग्रहण करेंगे। जिसे दैवीय प्रकोप से जोड़कर देखा जाता है। यह जानकारी देते हुए राष्ट्रीय सिंधी समाज जिला प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि इस दिन सिंधी समुदाय पूर्व संध्या रविवार 9 अगस्त पर बनाया गया भोजन ग्रहण करेगें। थदड़ी सिन्धु सभ्यता और संस्कृति का प्रमुख पर्व है। समाज के बालकधाम प्रमुख बाबा माधवदास उदासी जी ने पर्व के महत्व का बखान करते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को माता (चेचक) निकलती है तो उसे देवी के प्रकोप जोड़ा जाता है। आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि माता चेचक के इंजेक्शन बचपन में ही लग जाते हैं। परंतु देवीय शक्ति से जुड़ा थदड़ी पर्व हजारों वर्षों पश्चात भी समुदाय का प्रमुख त्यौहार माना जाकर आस्था और विश्वास से मनाया जाता है। इस मौके पर पूर्व संध्या पर विभिन्न तरह के सिंधी व्यंजन मिठी और बेसणजी कोकी, गच्च, पकौड़ा, आलू भिंडी की सब्जी एवं दही छाछ जैसे सूखी सब्जियां, दही रायता बनाया जा कर थदड़ी के दिन पूर्ण श्रद्धा के साथ माता को अपने प्रकोप से बचाने की कामना के साथ ग्रहण किया जाता है। कल सोमवार को प्रातः काल समाज की महिलाओं व्दारा ब्राह्मण के घर जाकर शीतला माता की पूजा अर्चना पश्चात घर आकर परिवार सहित भोजन ग्रहण करेंगी।

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