काव्यभाषा : वीर सपूतों को नमन – दीप्ति सक्सेना, बदायूं

Email

वीर सपूतों को नमन

जिन वीरों के लहू ने सींचा,
स्वतन्त्रता का दिव्य सुमन।
वीर भूमि भारत के सपूतों,
हाथ जोड़ कर तुम्हें नमन।

घर छोड़ा , घरवाले छोड़े,
पग – पग पर संघर्ष किए।
स्वतन्त्रता की बलि वेदी पे,
हँस के प्राण उत्सर्ग किए।
मिला कष्ट एकांत अंत में,
मगर मिल नहीं सके स्वजन।
वीर भूमि भारत के सपूतों,
हाथ जोड़ कर तुम्हें नमन।

अंग्रेजों ने नग्न बदन पे,
सौ – सौ कोड़े बरसाए।
जी चाहा वो दी प्रताड़ना,
दंड – प्रहार दे हरषाए ।
काले पानी की भी सजा,
न झुका सकी सिंह की गर्दन।
वीर भूमि भारत के सपूतों,
हाथ जोड़ कर तुम्हें नमन।।

पंद्रह अगस्त का पावन दिन,
वीरों की गाथा गाता है ।
अमरलोक के वासी जिन्हें,
धरती पे पूजा जाता है ।
स्वतन्त्रता की भेंट दी हमको,
देकर अपना तन- मन- धन।
वीर भूमि भारत के सपूतों,
हाथ जोड़ कर तुम्हें नमन।।

-दीप्ति सक्सेना
(सहायक अध्यापक)
विद्यालय-पूर्व माध्यमिक विद्यालय कटसारी
वि0क्षे0-आलमपुर जाफराबाद
जनपद-बरेली
निवासी-बदायूँ।

7 COMMENTS

  1. रचना प्रकाशित करने हेतु संपादक महोदय का हार्दिक आभार

  2. भारत के वीर योद्धाओ की वीरता सुनंदर वर्णुन।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here