काव्यभाषा : हम अंग हैं जीवन का -डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

Email

हम अंग हैं जीवन का

हम हुये हैं वयोवृद्ध
अनुभव से समृद्ध
उम्र दी ईश्वर ने हमें
जो पा न सके कुछ मित्र

ये झुर्रियां चेहरे की
और सिर के उड़े बाल
मिला हमें सौभाग्य से
देख रहे आंखों से जगत का हाल

जिह्वा का स्वाद और
नयनों में दृश्य
मन की उमंग,और
हाथ,पैर स्वस्थ

ये जीवन आज भी जी रहे
ये अमृत अब तक पी रहे
हम विचार करें मित्रों के बारे में
जो अब हमारे बीच नहीं रहे

ब्रज,करें आभार नित
जग के पालन हार का
अब भी हम अंग हैं
जीवन का,संसार का

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here