काव्यभाषा : तुम्हारा साथ -वीरेन्द्र कुमार साहू,गेरुवाडाँड़, लांजीत

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तुम्हारा साथ

चल हवाओं में संगीत घोलते हैं
चुपचाप एक दूसरे से बोलते हैं
बहुत हलचल है अंतर्मन में
छोड़ सन्नाटे को तलाशते हैं

जिधर भी नजर जा रही
है मंजर डरावना सा
भीड़ बढ़ती जा रही है
मन अकेला तन्हा तन्हा सा

झरने के गिरने का शोर
बाहर ज्यादा चंचलता है
देखता हूं गहराइयों में
शांत और ज्यादा स्थिरता है

तुम साथ कर देते तो
मंजिल हम भी पा जाते
आओ मिलकर चले संग
सफर अकेला कटता नहीं।

वीरेन्द्र कुमार साहू
सहायक शिक्षक
प्र.शाला गेरुवाडाँड़, लांजीत
विकासखंड ओड़गी जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़
मो.न. 9926121847
7000172159

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