विविध : पाश्चातय परिधान और आधुनिक विचार -नीलम द्विवेदी रायपुर छत्तीसगढ़

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पाश्चात्य परिधान और आधुनिक विचार

” तन सुंदर है माना हमने, मत करो प्रदर्शित दुनिया में,
तन से भी सुंदर तो मन है, हो यही प्रदर्शित दुनिया में।”
हमारा परिधान यानी पहनावा अर्थात ऐसे वस्त्र जिन्हें शरीर पर धारण किया जाता है,जिसका मूलभूत उद्देश्य होता है शरीर को सभ्यता के साथ दुनिया के समक्ष रखने योग्य बनाना और साथ ही शरीर को इस वातावरण के विपरीत असर जैसे धूप, तेज हवा, प्रदूषण ,ठंड आदि से सुरक्षा प्रदान करना।

आजकल जो परिधान हमारे युवा वर्ग पहन रहे हैं वो पाश्चात्य परिधान के अंतर्गत आता है। ये परिधान विदेशी संस्कृति से प्रेरित हो कर बनाया गया है। इसमें विशेष तौर पर जीन्स, कोट,टाई, मिनी फ़्रॉक्स, स्कर्ट्स आदि आते हैं। पहनावा हर जगह की जलवायु व भोगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जहाँ की जलवायु ठंडी है ,ठंड से बचने के लिए कोट, पेंट पहनना उन देशों के लोगों की जरूरत है। पर हमारे देश की जलवायु गर्म है यहाँ ये पहनावा पहनना अनुकूल नहीं है। पर बिना विचार किये फ़ैशन के नाम पर हमने इसको अपना लिया है। पारम्परिक परिधान धोती कुर्ता, पायजामा, साड़ी ,सलवार कमीज, ये सब वस्त्र पहनने वाले आज आउटडेटेड यानी पुराने विचारधारा वाले कहलाते हैं। कई जगह ऐसे लोगों का मजाक भी उड़ाया जाता है।माना की सभ्यता प्रगतिशील है, समय के साथ परिवर्तन आता है पर हमें अपनाने योग्य बातों का ही सोच समझ कर ही अनुकरण करना चाहिए।

गांधीजी ने जो खादी के, सूत के वस्त्र पहनने पे जोर दिया था उसका हमारे शरीर पर भी अनुकूल असर है। ये वस्त्र शरीर को अनचाहे संक्रामक और विषाक्त पदार्थों से दूर रखते हैं और स्वच्छ हवा अर्थात ऑक्सिजन को शरीर तक पहुँचाते हैं। क्या आपको लगता है कि इतने मोटे मोटे जीन्स पहनकर हमारा शरीर साँस भी ले पाता होगा? आप कहेंगे आजकल तो जीन्स चारों तरफ से कटी फटी रहती है, फिर हवा की क्या समस्या। ऐसे कपड़ो से हमारा व्यक्तित्व ही बदल जाता है। समझ ही नहीं आता कि कपड़ा नया है या पुराना। अंग प्रदर्शन की तो बात ही क्या करना।आज मैं लड़के लड़कियों को अलग करके बात नहीं कर रही हूँ। अगर कटे – फटे कपड़ों में , कमर के नीचे सरकते जीन्स में लड़कियाँ अश्लील लगती हैं तो क्या जब हमारे बेटे ऐसे कपड़े पहनते हैं तो हम शर्मिंदा नहीं होते?

आज इस आधुनिक समय में हम पालकों का,शिक्षकों का और देश के हर जागरूक नागरिक का ये फर्ज है कि हम अपने
युवा वर्ग को वस्त्रों का सही अर्थ और उद्देश्य समझाएं। उनको फ़ैशन का अंधानुकरण करने से रोकें।

नीलम द्विवेदी
रायपुर छत्तीसगढ़

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