लघुकथा : फाइटर -अनंत ज्ञान हजारीबाग(झारखंड़)

Email

फाइटर

सत्तहतर वर्ष के श्रीमान वी.आई.पी प्रसाद की कोरोना रिपोर्ट जैसे ही पॉजिटिव आई सभी न्यूज़ चैनल्स गला फाड़ फाड़ कर चिल्लाने लगे । मीडिया श्रीमान वी.आई.पी प्रसाद का हाल समाचार लेने को बैचेन, बेताब हो उठी । सारे रिपोटर्स उनके खाने पीने से लेकर उठने बैठने की पल पल की ख़बर पहुँचाने लगे । कहीं कहीं श्रीमान वी.आई.पी प्रसाद के भक्त यज्ञ, हवन, पूजा पाठ भी प्रारंभ कर दिए । डॉक्टर्स, मेड़िकल स्टाफ्स, नर्स आदि ने भी पूरे तन मन से श्रीमान वी.आई.पी प्रसाद जी की सेवा सुश्रुषा की । किसी ने किसी तरह की भी लापरवाही ,कोताही नहीं बरती। परिणाम यह हुआ की एक सप्ताह बाद श्रीमान वी.आई.पी. प्रसाद का रिपोर्ट पॉजिटिव से निगेटिव हो गया और श्रीमान वी.आई.पी प्रसाद जी को “फाइटर” की उपाधि मिली ।
सतहत्तर वर्ष के श्रीमान कॉमन मैन की कोरोना रिपोर्ट जैसे ही पॉजिटिव आई, गैरों की छोड़िए अपनों ने ही उनसे दूरी बना ली । हॉस्पिटल में तुरंत बेड़ की कमी हो गई और श्रीमान कॉमन मैन दो दिन यहाँ वहाँ भटकते ही रह गए । अस्पताल के बाहर वे बेबस लाचार पड़े रहे परंतु मीड़िया की नज़र नहीं पड़ी । आखिरकार किसी तरह उन्हें एक अस्पताल ने भर्ती ले लिया मगर ड़ॉक्टर्स और उस अस्पताल के कर्मचारियों का रवैया उनके प्रति इतना ख़राब था कि दिन प्रतिदिन उनका वहाँ दम घुटने लगा । न ही समय पर दवाई मिल रही थी न ही खाना । फिर भी उन्होंने हिम्मत जुटाई अस्पताल में ही अड़े रहे । परिणाम यह हुआ कि एक सप्ताह बाद उनका रिपोर्ट पॉजिटिव से ड़बल पॉजिटिव हो गया और श्रीमान कॉमन मैन जी को “स्वर्गीय” की उपाधि मिली ।

© अनंत ज्ञान
हजारीबाग(झारखंड़)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here