काव्यभाषा: ईश्वर वो दिन फिर लौटा दे – राजीव रंजन शुक्ल पटना ,बिहार

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ईश्वर वो दिन फिर लौटा दे

ईश्वर वो दिन फिर लौटा दे
फिर अपने मित्रों से मिलवा दे
कितना भी रहते उदास
जब मिलते तो होता हास परिहास
क्यो हम हो गए बड़े
कब हम हो गए बड़े
याद आती है समय मस्ती भरे
आते है जब वो दिन याद
तो दिल यही मांगे आशीर्वाद
ईश्वर वो दिन फिर लौटा दे
फिर अपने मित्रों से मिलवा दे
क्यूँ जीवन ऐसा होता है
हकीकत मे बदलने स्वप्न
क्यो खोतें है हम मित्र बचपन
शायद फुरसत नहीं अब किसी को
दोस्त नहीं जरूरत अब किसी को
मैनजर हूँ, डॉक्टर हूँ , हूँ इंजीनियर
व्यस्त हूँ व्यापार मे ,नहीं समय है अब यार
अब नहीं
पहले का राम, श्याम और घनश्याम
अभी हूँ व्यस्त बात करूंगा कल शाम
चलो फ़ेस बूक पर मिलते है
व्हाट्स अप पर लिखते है
क्यो बिखर गया वो अपनापन
कॉलेज –स्कूल की यादें
गली-मुहल्ले के धूल धक्कर
आज वो पल क्यो सब भूल गए
क्या दुनियादारी की व्यस्तता मे
पुरानी यारी भूल गए
अब तो सभी के नाम के पहले
प्राप्त पद झूल गए
ईश्वर वो दिन फिर लौटा दे
फिर भूले मित्रों को मित्र बना दे
फिर अपने मित्रों से मिलवा दे॥

राजीव रंजन शुक्ल
पटना ,बिहार

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