काव्यभाषा : बचपन – अजय कुमार यादव ,प्रतापपुर

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“बचपन”

(1)
प्यार से पुचकारी मिलती है सबको अपने बचपन में,
गोदी में उठा के सबकी दुलारी मिलती बचपन में ।
किस्से और कहानी दादा दादी सुनाती है बचपन में,
चाकलेट और बिस्किट जुबानी मिलती है बचपन में।।
(2)
पापा आते गोदी में उठा के मेरा मुन्ना राजा कहते है,
मम्मी बात बात में पुचकारी करती है मुझको।
सारे मोहल्ले वाले प्यार से गोलू कहते है मुझको,
पल पल की ज़िन्दगी मेरी उनकी जिंदगानी बनती है।।
(3)
धड़कन हूं मै उनकी मुझसे है उनकी जिंदगानी,
बहुत मन्नतें को बाद पापा मम्मी ने मुझे पाया है,
मेरी खातिर पलके बिछाए रहते है सभी मेरे अपने
अपनी आंखों में कितने सपने सजाए बैठे मेरे अपने।।
(4)
आम तोड़ने जाऊ मै जब खूब ऊधम मचाऊ मै
स्कूल से थक हारकार जब शाम को घर आऊ मै
खाना ना खाने के कितने बहाने जब बनाऊ मैं,
ना जाने कितने ही शरारत करके सबको सताऊ मै।।

अजय कुमार यादव
शिक्षक
शास.पूर्व माध्यमिक शाला जरही,
प्रतापपुर,सूरजपुर,छ. ग.
मो.9977373081

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