काव्यभाषा : पहली मुलाकात – नीलम द्विवेदी रायपुर छत्तीसगढ़

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पहली मुलाकात

तुमसे पहली मुलाकात न भुलेंगे कभी,
वो बरसात की बौछार न भुलेंगे कभी,

एक छाते में आधे भीगते और कांपते,
वो पिघलते हुए जज़्बात न भुलेंगे कभी।

कुछ नए से जो अहसास जगे थे मन में,
कोई आँखों से उतर कर समा गया दिल में,

जैसे वीणा का कोई तार छिड़ गया उर में,
जैसे खुशबू कोई हवा में फैली हो अभी,

कोई वादा, न कसम न कोई बात हुई,
पर मौन के वो संवाद न भुलेंगे कभी,

तुमसे पहली मुलाकात न भुलेंगे कभी,
वो बरसात की बौछार न भुलेंगे कभी।

पोछकर मेरा चेहरा जो निचोड़ा था दुप्पट्टा तुमने,
उसकी हर बूँद गिरी थी मेरे ही अन्तर में,

आज भी बारिशें वैसे ही भिगोती तन को,
पर उस बारिश से मिला स्वाद न भूलेंगे कभी।

आज भी वो टूटा हुआ छाता सजा मेरे घर में,
उन यादों की सौगात न भुलेंगे कभी,

तुमसे पहली मुलाकात न भुलेंगे कभी,
वो बरसात की बौछार न भुलेंगे कभी।।

नीलम द्विवेदी
रायपुर छत्तीसगढ़

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