काव्यभाषा : पापा -अर्पणा दुबे,अनूपपुर मध्यप्रदेश

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पिता और पुत्र,,,

पापा मेरे प्यारे पापा,
छोटे में उँगली पकड़कर चलना सिखाया पापा,
हर सुख दुःख में देते साथ,
मेरे दिल में हमेसा रहते पापा,
हर छोटी सी भूल को माफ करदेते है पापा,
अपने आँखों से ओझल नहीं होंने देते पापा,
हर उलझन से निपटना सिखाया पापा,
हर भगवान से बढ़ कर होते हैं पापा,
जिसके पास होते है पापा वह दुनिया का सबसे अमीर हैं,
हर छोटी सी भूल को माफ कर सीने से लगा लेते है पापा,
हर सपने को पूरा करते है पापा,
पिता पुत्र का प्रेम है सागर से भी प्यारा ,

पापा मेरे प्यारे पापा।

अर्पणा दुबे
अनूपपुर मध्यप्रदेश

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