प्रणेता साहित्य संस्थान,दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन

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प्रणेता साहित्य संस्थान,दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन

प्रणेता साहित्य संस्थान,दिल्ली द्वारा 26 जुलाई 2020 को आॅनलाइन काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन संस्थान के संस्थापक एवं महासचिव श्री एस जी एस सिसोदिया जी ,अध्यक्षा सुषमा भण्डारी जी और उपाध्यक्षा शकुंतला मित्तल,सचिव भावना शुक्ल,कोषाध्यक्ष चंचल पाहुजा के सक्रिय प्रयासों से सफलता पूर्वक संपन्न हुआ,जिसमें विभिन्न राज्यों के 20रचनाकारों ने अपनी सकारात्मक प्रतिनिधि रचनाओं से समां बांध दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं श्रीमती वीणा अग्रवाल जी द्वारा माँ शारदे की वंदना तथा अतिथियों द्वारा माल्यार्पण के साथ हुआ।वीणा अग्रवाल जी ने मधुर स्वर में ‘ वरदायिनी वरदान दो,अंतःकरण में ज्ञान दो’ की सुमधुर प्रस्तुति से मंच को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
सरस्वती वंदना के पश्चात संस्थान के संस्थापक और महासचिव एस जी एस सिसोदिया जी ने अपने उद्बोधन में प्रणेता साहित्य संस्थान का संक्षिप्त परिचय देते हुए सभी उपस्थित साहित्यकारों को शुभकामनाएँ प्रेषित की।
यह गोष्ठी प्रतिष्ठित कवयित्री सरोज गुप्ता जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठित कवि एवं गीतकार जगदीश मीणा जी ने अपनी गरिमामय उपस्थिति से मंच को सुशोभित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में जानी मानी साहित्यकारा डाक्टर स्मिता मिश्रा जी उपस्थित थीं।
प्रणेता साहित्य संस्थान की इस भव्य काव्य गोष्ठी का संचालन सुप्रसिद्ध कवयित्री सुषमा भण्डारी जी ने बहुत ही कुशलता से किया। सभी कवियों ने अपनी विभिन्न प्रतिनिधि समसामयिक विषयों पर प्रस्तुति से काव्य गोष्ठी की शाम को यादगार बना दिया।
मुख्य अतिथि जगदीश मीणा जी का शृंगार गीत ‘बिन मुहब्बत जिस्म ये खंडहर पुराना हो गया
मेरे दिल को मुस्कराए इक ज़माना हो गया।’ आयोजन का मुख्य आकर्षण और केन्द्र बिंदु रहा और सराहा गया।
सुप्रसिद्ध पत्रकार गोविंद सिंह जी ने ‘मनमोहिनी सलोनी सूरत चंचल चितवन वाली हो’ की लाजवाब प्रस्तुति से सबको मुग्ध कर दिया। आयोजन की अध्यक्षा सरोज गुप्ता जी ने’अंधेरी है भादों की रात,सूझता नहीं हाथ को हाथ’ और विशिष्ट अतिथि स्मिता मिश्रा जी ने’मन बहता पवन सा,अभी यहाँ,तभी वहाँ ‘ से मंच पर वाह वाही लूटी।
रामनिवास ‘इंडिया’ जी ने ‘ मोबाइल खोलता हूँ,कोरोना की बात बोले’ ठेठ देसी अंदाज में गा कर सबका मन मोह लिया।
विनीता सरस्वती जी ने ‘सावन आया सखी,हाथ थाम ले मेरा गीत से सावन का उल्लास छलकाया।
अशोक पाहुजा जी की रचना ‘भारत की इस पुण्य भूमि का आओ हम सम्मान करें ‘ देशप्रेम जगाने में सफल रही।
युवा कवयित्री शिप्रा झा ने ‘गम का पहाड़ ढोए कितना मुस्कुराते हैं लोग’ रचना प्रस्तुत कर सबका मन जीत लिया।
दिनश चंद्र प्रसाद ‘ दीनेश’ जी ने ‘कोख में तब बेटियाँ मरती हैं ‘ प्रस्तुत कर सबके समक्ष गंभीर प्रश्न रखा।
कवयित्री श्वेता कंसल ने’मैंने अपनी बिटिया में अपनी छवि पाई’ उसने मुझे मेरी खोई पहचान दिलाई ‘ रचना से मातृत्व और वात्सल्य रस को मूर्तिमान कर दिया।
कुसुम लता ‘कुसुम ‘ जी ने पर्यावरण की चिंता को गीत में स्वरबद्ध करते हुए कहा,’जीवन खतरे में है जग का,संकट पर्यावरण बढ़ा ‘।
तरुणा पुण्डीर ‘तरुनिल’ ने ‘मेरा कृष्ण कहाँ है’ रचना में नारी मन के दर्द और व्यथा को पिरो कर मार्मिक प्रस्तुति से सबको भावविभोर कर दिया।
कवयित्री गीता प्रकाश जी ने ‘कोरोना’ को अलग अंदाज़ में प्रस्तुत किया।
सुधा श्रीवास्तव ‘पीयूषी ‘ जी ने सावन में मेले के दृश्य को स्वरबद्ध करते हुए कहा,’ सावनी बहार पिया आ ही गयो ना।’
रितु प्रज्ञा जी ने बाढ़ का विध्वंसक रूप ‘हाहाकार मचा धरा, बाढ़ पानी है पसरा’ रचना से प्रस्तुत किया।
राजेशवरी जोशी जी ने ‘मन करता है कुछ लिखूं ‘ कुछ अच्छा लिखूं ‘ रचना से कलमकार मन की इच्छा को अभिव्यक्ति दी।
अंजू कोहली जी ने ‘माँ तू आज भी ख्यालों में आ जाती है’ रचना की भावभीनी प्रस्तुति दी।
मंच पर अनेक वरिष्ठ साहित्यकार श्रोता रूप में उपस्थित हो कर प्रतिभागी साहित्यकारों की रचनाओं पर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दे कर उनका मनोबल बढ़ाते रहे।
मुख्य अतिथि जगदीश मीणा जी और विशिष्ट अतिथि स्मिता मिश्रा जी ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उनकी रचनाओं की समीक्षा प्रस्तुत कर सबका हौंसला बढ़ाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सरोज गुप्ता जी ने सबका आभार व्यक्त करते हुए सभी रचनाकारों को बधाई दी और प्रणेता साहित्य संस्थान के उज्ज्वल भविष्य की कामना व्यक्त की।
कार्यक्रम में प्रणेता की संरक्षक और परामर्शदात्री पुष्पा शर्मा कुसुम और कार्यकारिणी सदस्यों में सरिता गुप्ता जी और के बी एस के प्रकाशक संजय कुमार जी की सक्रिय उपस्थिति भी रही।
अंत में महासचिव एस जी एस सिसोदिया जी और उपाध्यक्ष शकुंतला मित्तल के धन्यवाद ज्ञापन से काव्य गोष्ठी का समापन हुआ।

शकुंतला मित्तल

1 COMMENT

  1. काव्य गोष्ठी प्रस्तुति की जानकारी , उत्तम

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