लघुकथा : पथ का चुनाव – डॉ संगीता तोमर इंदौर मध्यप्रदेश

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पथ का चुनाव

दसवी के परीक्षा परिणाम घोषित हो चुके थे। मिनी ने डरते हुए अपना रोल नंबर वेब साइट पर डाला ।उसे जिस बात का डर था वहीं हुआ था। उसे गणित में अपेक्षाकृत कम अंक मिले थे। परिणाम देख वह हताश हो गई।
उसने गणित विषय लेने का ही निश्चय किया था ,क्यूंकि उसकी सहेलियां गणित विषय लेने वाली थी। परिवार में भी सभी गणित विषय लेने वालों को बुद्धिमान व बाकी विषयों को निम्न स्तर का समझते थे। उसे लगा मां-पापा को शर्मिंदा होना पड़ेगा। तभी पापा आए और उसका उतरा चेहरा देख कर उदासी का कारण पूछा । कारण जानकर वे मुस्कुराने लगे और कहा सिर्फ गणित विषय ही बुद्धिमता का मापदंड नहीं होता है। हर व्यक्ति के पास अलग तरह की बुद्धिमत्ता या कौशल होता है जो कि निर्भर करता है, हमारे दिमाग का कौनसे हिस्से ज्यादा सक्रिय है उस पर। हर हिस्सा एक अलग तरह के कौशल के लिए होता है। जो लोग डॉक्टर या इंजीनियर हैं वे क्या हर काम में अच्छे होते है जैसे संगीत, रचनात्मकता,खेलकूद, साहित्य प्रकृति के प्रति रुझान होना या वे आदि? वे अच्छे वक्ता भी हो ये ज़रूरी नहीं है। उनकी तार्किक बुद्धि ज्यादा प्रबल होती है इसलिए गणित उन्हें भाता है।
और तुम तो भाग्यशाली हो जो तुम्हारी तार्किक बुद्धि के साथ साहित्यिक, रचनात्मकता , भाषा ये सारे कौशल विकसित है। अब आते है कि तुम्हें कौनसा विषय चुनना चाहिए? पिता होने के नाते मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं पर निर्णय सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा ही होना चाहिए।
उसके लिए अपने आप से सही प्रश्न पूछो और उनके उत्तरो में ही तुम्हरा निर्णय छिपा होगा। पहला प्रश्न ऐसा कौनसा काम है जिसे करते वक़्त तुम्हें सबसे ज़्यादा आनंद आता है,और समय का भान नहीं रहता?
मिनी बोली मुझे कविताएं लिखते वक्त और किताबे पढ़ते वक़्त समय का पता ही नहीं चलता।
क्या तुम ये काम जीवन भर कर सकती हो? पापा ने पूछा हां पापा मौका मिले तो मैं ये जीवन भर करना चाहूंगी। “और तुम्हारा अभी तक सबसे रुचिकर विषय कौनसा रहा है ,जिसे पढ़ना तुम्हें कभी बोझिल नहीं लगा?” पापा आप तो जानते है इतिहास मेरा पसंद का विषय है। क्या तुम्हारी सारी सहेलियां भी ये कर पाती है? नहीं पापा वे मेरी सहायता लेती है । पापा बोले और ना ही हमारे परिवार में कोई तुम्हारे जैसी सुंदर कविताएं लिख सकता है। हर व्यक्ति अलग है ,उसकी अलग पहचान है। गणित लेकर औसत इंजीनियर बनने से अच्छा है, तुम एक प्रतिभाशाली लेखिका या कवियत्री बनो। इतिहास विषय में रिसर्च भी कर सकती हो। अपना ब्लॉग लिख सकती हो। अपना ज्ञान सबके साथ बांटने हो तो शिक्षिका बन सकती हो। इस तरह तुम तनाव से दूर रहोगी। ज़्यादातर बच्चे अपनी रूचियों को अनदेखा कर परिवार और समाज की खोखली मानसिकता का शिकार बन,भेड़चाल का हिस्सा बन जाते है ।जीवन भर वह काम करते है जो उन्हें पसंद नहीं है और सुख-चैन गवा देते है। गणित विषय लेकर यदी तुम जीवन भर खुश रह सकती हो तो अवश्य लो। निर्णय तुम्हारा है।
और अब मिनी ने निर्णय ले लिया था।

डॉ संगीता तोमर
इंदौर मध्यप्रदेश

मौलिक व स्वरचित

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