काव्यभाषा : आँसू मन मीत हैं – डॉ सुरंगमा यादव ,लखनऊ

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आँसू मन मीत हैं

दर्द की पनाह में
जिंदगी गुज़र गई
जिस तरफ़ बढ़े कदम
रोशनी सिहर गई

स्वप्न टूटने लगे
नैन भीगने लगे
प्रीत को पुकारते
चाँद रात ढल गई

कल कभी आएगा
फ़ासला मिटाएगा
हश्र ये हुआ मगर
राह ही बदल गई

तेरी ये बेरुख़ी
मुझे रास आ गई
जीत की नई कड़ी
हार आज बन गई

आँसू मन-मीत हैं
बनते ये गीत हैं
हम रहें , न रहें
भोर नई खिल गई।

-डॉ सुरंगमा यादव ,
लखनऊ

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