काव्यभाषा : कोरोना: एक प्रतिक्रिया – डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

Email

कोरोना: एक प्रतिक्रिया

पढिकै बहुत मजा है आवा
अइसन पोस्ट अउर पठावा
सही कह रहे जमील तूँ भाई
दिन भर देखैं, वही लुगाई

कोरोना को नास कब हुई हैं
कब बाजार में कुल्फी खइहैं
कबै मिलेंगें दोस्त पुराने
दूर दूर रह के दुखियाने

कोरोना है बहुत डरावै
ऊपर से सरकार सतावै
मुँह में ढक्कन बाँध रहे है
दूर दूर सब ठाड़ रहे हैं

साबुन साबुत नहीं बच रहे
हाथ मे रेखा रोज घिस रहे
किस्मत सीधी नही होये रही
कोरोना के नाम रोये रही

ब्रज कै कविता कोरोना सुन पाय
रहै दूर निकट नहिं आय
यही उपाय अब सबै लगावैं
कोरोना कै दूर भगावैं

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here