काव्य भाषा : गीत – राजेन्द्र श्रीवास्तव विदिशा

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गीत

सभी के साथ गाएँ, गुनगुनाएँ

अपरिमित कष्ट झेले,
दुख उठाए
रहे चुपचाप चलते,
बिन बताए।
हृदय अब कह रहा है,सब भुलाएँ

थकन-टूटन समेटे
कुछ न होगा
सभी भूलें सहा जो
और भोगा।
नये पद-चिन्ह पथ पर, फिर बनाएं

चला जाता डगर पर
बिन सहारा
अकेला अनमना सा
दिल हमारा
तुम्हे आवाज देकर, हम बुलाएँ

राजेन्द्र श्रीवास्तव
विदिशा

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