नागरिक पत्रकारिता: रक्षा पत्र सेना के नाम-अनंत धीश अमन, गया जी

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रक्षा पत्र सेना के नाम

भारतवर्ष के ह्रदयस्थ हिम से सिन्ध तक की सेना को अनंत प्रेम भरा प्यार ।।

सावन की माह में जहाँ भारतवर्ष के हर कोने से हर हर महादेव का जयघोष हो रहा है वहीं सरहद पर आप भारत के वीर वंदे अखंड भारतम् का जयघोष कर रहे है, जिससे दुश्मन के होश ठिकाने लग रहे है ।।

आपके वीरता और गर्जन की गूंज भारतवर्ष के सड़क से संसद तक सुनाई देता है भाई और यही गूंज भारत की अस्मिता और अखंडता को चरितार्थ करता है। भारत के मन (सेना) पर भारत के जन का अटूट विश्वास है और इसी अटूट अनंत विश्वास पर भारत माँ का गान है ।।

भारतवर्ष की संपूर्ण अखंडता का आस आपके निगाह बान आँखे करती रहती है जो कभी न पलकती है न झपकती है आपकी फौलादी बाँहें सागर को थाम रखी है और आपके कदम रेगिस्तान के रेत को इस कदर थामें है कि तुफान भी उसको डिगा नही सकती है ।।

इसतरह का रक्षाकवच आपने भारतवर्ष के सभी नागरिक को दे रखा है जिसके कारण हम सब सुख चैन से अपना जीवन यापन बड़े ही खुशी से करते है ।।

सावन पूर्णिमा के दिन संपूर्ण भारतवर्ष में बहन भाई को कच्चे धागे को बाँधकर उसके चिरायु कि कामना करती है जिसे रक्षाबंधन के नाम से जाना जाता है ।।

इस दिन को रक्षा पर्व बनाने की पहल को हम भारतवासी ह्रदय से साधुवाद करते है और भारतवर्ष की सभी माता एंव बहने अपने भारत के मन (सेना) को रक्षा धागा भेजकर आपके चिरायु होने की कामना करती है ।।

आज यह पत्र के माध्यम से भारत के मन (सेना) को रक्षा पत्र भेज रहा हूँ।

अनंत धीश अमन
गया जी

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