काव्य भाषा : वह बड़ी हो गयी – डॉ वासुदेव यादव

Email

वह बड़ी हो गयी

वह छोटी थी
एक बच्ची थी ,
खिलन्दर ,
उन्मुक्त .
चंचल सी |
यहां – वहां
उड़ती
तितली सी ,
नही – नही
परी सी ,
एकदम से
बड़ी हो गयी |
मैं बैचैन हूँ ,
शायद अच्छा
नही लगा
उसका यूँ ,
एकदम से
बड़ी हो जाना |
वह एकदम
प्यारी सी थी ,
मिश्री सी ,
आँखों से देखो तो
घुल जाये
मन में ,
अतुलनीय
मिठास सी
वात्सल्यता की |
मैं अचंभित
वह छोटी थी
एकदम से
बड़ी हो गयी |

– डॉ वासुदेव यादव

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here