काव्य भाषा : अमर हुई यह प्रेम कहानी – सुषमा दीक्षित शुक्ला ,लखनऊ

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अमर हुई यह प्रेम कहानी

अपने श्याम सँग झूला झूलें,
प्यारी राधा रानी।
सावन पर भी यौवन छाया,
झमझम बरसे पानी ।
हरा भरा हरियाला मौसम,
भीगा भीगा तन मन है ।
राधाकिशन की प्रीति देखकर,
हर्षित सारा उपवन ,है ।
नाच रहीं यमुना की लहरें ,
कितनी सुन्दर थिरकन है ।
धरती अम्बर एक हुए हैं ,
पावस विह्वल जोगन है ।
दशों दिशाएं झूम रही हैं ,
मादकता मे मधुबन है ।
मोर पपीहा पँछी गाये ,
जैसे पागल विरहन है ।
कोमल किसलय जैसी राधा ,
डूब गयी है मोहन में ।
जगमोहन भी डूब गये हैं,
राधा के सम्मोहन में ।
सखियाँ सारी बाट जोहती,
अपनी अपनी बारी की ।
स्वयं प्रकृति भी दृश्य देख यह,
गर्वित है सुकुमारी सी ।
मोहन जैसा प्रियतम पाकर ,
धन्य हुई राधा रानी ।
अमर प्रेम इतिहास रचाया ,
अमर हुई ये प्रेम कहानी

© सुषमा दीक्षित शुक्ला
लखनऊ

1 COMMENT

  1. बहुत सुंदर सावन की कविता। बधाई।

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