व्यंग्य : बम की अभिलाषा – विनय चौधरी ,भोपाल

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बम्म की अभिलाषा !!

” बम ” शब्द तो अंग्रेजी है पर हिंदी में देशी दारू सा महत्व बनाये हुए है बरतानिया लोग हिंदुस्तानी वैभव के साथ यहाँ की जीवन शैली रहन सहन सब लूट कर ले गये और विरासत में शेकहैंड सॉरी थैंक्यू बम दे गये ! बस इन्हीं में गुजर बसर हो रही हैं ।

बम कई प्रकार के पाये जाते हैं बमों में एटम बम सभी बमों में चौधरी है इसका फटना जरूरी नहीं है होना जरूरी है इसकी धौंस से पाकिस्तान भूखा रह कर भी गुजर जाने तक गुजर बसर कर सकता है ! लक्ष्मी बम में लक्ष्मी देवी का फ़ोटो लगा कर जिन जिन लोगों ने बम फोड़े हैं लक्ष्मी उनके घर हर साल आती है ….मगर आप हैं कि बम बम बूम फटाक !!

कच्ची उमर में चारों तरफ बम ही बम दिखाई देते है और पट्ठे अपनी दिया सलाई ले कर गूगल सर्च करते रहते है अगरचे किसी बम की बत्ती और दिया सलाई का संपर्क हो गया तो धम्माके पक्की उमर तक सुनाई देते है इसलिये बम और दिया सलाई दोंनो की दो गज की दूरी है जरूरी की सलाह कोरोना की तरह मुफ्त में दी जाती है !

एक बम ऐसा भी होता है जो सुर सुर करते फुफकारता तो ऐसे है कि चांद तक सुनाई देगा मगर क्लाइमेक्स तक आते आते ध्वजभंग हो जाता ऐसे बम “फुस्सी बम” की केटेगौरी में आते हैं
बाद में उसे उलट पलट करते रहो बारूद तो मिलेगी और जलेगी भी पर फुसफुसा के रोशनी कर देगी इससे जियादा कुछ नहीं दीवाली तो मनेगी नहीं पर दीवाला जरूर निकल सकता है ऐसे भरोसे के फुस्सी बम के भरोसे में हाथ भी जल सकते है हमारी न मानो तो पानी से बिजली निकाल कर पानी को कमजोर करने वाले सिद्धान्त का प्रति-पादन करने वाले राजगुरु अ-शोक से को समर्थन दे कर राजधानी एक्सप्रेस में सीट कन्फर्म करवा लो !!

भई ! भोपाली होली तो रंगीन हो ली पर राखी पर जीजा जी ने लाज न राखी और जिज्जी को मैके न आने न दिया पर उम्मीद है अबके दीवाली शेरो की मांद में मुंबई की रहेगी..!! क्योकि शेरों के तो डीएनए में बाम-बे है ।

ऐसे ही त्योहार मनते रहें तो तो दिल्ली भी दूर नहीं है क्योकि बिल्ली के भाग से दिल्ली का छींका भी टूटेगा !! मुझे और मेरी बातों को सीरियसली न लेने वाले बाद सीरियस हो जाते है आगे
अपने जान माल की सवारी खुद जिम्मेदार है !

अंत मे सभी छोटे बड़े जीवित अजीवित मौसम विज्ञानी बमों की यही अभिलाषा चारों वेदों के ज्ञाता चतुर्वेदी माखनलाल ने मेरे शब्दों में कुछ यूँ कही है ।

बम्म की अभिलाषा !!

चाह यही
में पावर सुख लूँ
सत्ता पद ऊंचा पाऊं !
चाह यही
में माधव बन कर
अहो भाग्य पर इठलाऊँ !
मुझे तोड़ लेना बम माली
उस पथ पर तुम देना फोड़
शाह राह पर बम्म फुटा कर
जिस पथ होती तोडम जोड़ ।।

©व्यंग्यकार –
विनय चौधरी
भोपाल

2 COMMENTS

  1. मजेदार है जी,
    वाह जिंदगी में यह भी जरूरी हो गया है।कलयुग में सभी रोबोट हो गए है।
    मुस्कान भी गायब हो गई है।
    धन्यवाद।💐🙏💐❤️💐⚽💐😀💐

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