लघुकथा : समय की मांग – डॉ चंचला दवे,सागर

लघुकथा : समय की मांग

विनी आज अपने बेटे के यहा आई हुई है ,कोरोना और लाक डाउन के चलते विनी और उसके पति का मन बहुत बेचेन था ना जाने कब बच्चों से मिलेंगे उन्हे देख पायेंगे या नही.
इसी ऊहापोह ,मन के अवगुंठन और दुश्चिंताओं के बीच ,दो माह कब बीत गये पता ही नहीं चला.
मां बाप की बैचेनी को देखते हुये,बेटे ने टैक्सी का प्रबंध कर अपने पास बुलवा दिया.
इस महामारी के चलते,स्कूल की आँनलाईन कक्षायें चल रही है,देख-देख कर विनी का मन कचोटने लगता है
पहले मोबाईल मत देखोआंखे खराब ‌हो जायेंगी,कहकर डांटने वाले मां बाप,बच्चों को डांट रहे हैं,बेटा तुम्हारी क्लास चल रही है,तुम बैठकर पढो.कैसी विडम्बना है.
आँनलाईन पढाई में शिक्षक तो पूरी मेहनत कर रहे है,बच्चे बिलकुल ही नहीं ध्यान दे रहे है
शिक्षा का स्तर क्या था,और क्या होने जा रहा है
इसी बीच__बहू की आवाज! मां चाय तैयार है
चाय पर बातो ही बातो में पढाई को लेकरं वार्तालाप हुआ
बेटा बोला-मां हम अपने बच्चों के भविष्य और पढाई के लिये कोई भी रिस्क लेने तैयार है
विनी शिक्षिका थी, विदिशा में भोपाल में उसकी ससुराल थी,हर अवकाश पर, शनिवार रविवार को उसे भोपाल जाना पडता था.इस बीच बच्चो का गृह,-कार्य बाधित होता.सुबह जैसे ही विनी को विदिशा जाने को तैय्यार देख,ससुर जी टोक देते ,आज नहीं कल चली जाना,एक दिन की पढाई में, कुछ नहीं होगा.
मन मसोस कर रह जाती विनी,पति-पत्नि दोनों की इतनी हिम्मत नहीं होती कि उनकी बात का विरोध कर सकते.पति के हाथ आवेदन भेज देती
बच्चे छोटे थे,आज से २५बरस पहले इतनी समझ नहीं थी,जितनी आज है.
अनेक अवसर ऐसे आते,जब विनी को अपनी छाती पर पत्थर रखना पडता,समय ही ऐसा था.
आज जब बेटे ने यह बात कही,तो विनी को लगा,बेटा सही कह रहा है.आज इतनी प्रतिस्पर्धा है, नवीन तकनीकी है,एक दिन भी बच्चों की पढाई को टालना,असंभव सा है,आज सभी शिक्षा के मानदंड बदल चुके हैं.
आज विनी विचार मग्न है,क्या परिवार के लिये त्याग करके,बडों का सम्मान करके क्या उसने कोई भूल की है. अपने बच्चों का भविष्य संवारने में कोई चूक हुई है.या जो बनना चाहते थे बच्चे,उनकी महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने में असमर्थ रही है.विनी ने तो वही किया,जो समय की मांग थी.
आज विनी अपने पोते पोतियों के भविष्य के बारे में निर्णय लेने का अधिकार बेटे-बहू पर छोडकर,किसी बात का आग्रह नहीं करती
उसने बेटे से कहा_जो भूल मुझसे हुई है,वह तुम लोग कदापि मत करना.
आज समय की यही मांग है.

डॉ चंचला दवे,
सागर म प्र

4 COMMENTS

  1. बच्चों की पढ़ाई की समस्या पर केन्द्रित बेहतरीन लघुकथा।

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