सबक-ज़िन्दगी के : जीवन के प्रति स्वीकार्य भाव रखिये – डॉ.सुजाता मिश्र ,सागर

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सबक-ज़िन्दगी के :
जीवन के प्रति स्वीकार्य भाव रखिये

जीवन में हम सभी कभी न कभी, किसी न किसी रूप में तनाव का सामना करते हैं।हमारी आयु के हिसाब से हमारें तनाव के कारण अलग होते हैं,किन्तु तनाव का प्रभाव लगभग एक सा ही रहता है।सदा सकारात्मक रहना,सदा प्रसन्न रहना किसी के लिए भी असंभव होता है, हम सब पर अपने आस – पास की परिस्थितियों का सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, और उसी अनुरूप हमारा व्यवहार या मूड भी प्रभावित होता है। यह विडंबना है कि जब प्रसन्न होते हैं तो हम दोस्तों के साथ, अपनों के साथ उस खुशी को बांटते हैं, जश्न मनातें हैं,किन्तु जब हम दुखी या चिंतित होते हैं तब हम सबसे कटकर कहीं खामोशी में छुप जातें हैं। अपने दुःख,अपनी चिंताओं को जताने में भी हमें शर्मिंदगी महसूस होती है। हमें लगता है कि लोग हमें आँकने लगेंगे, कई लोग ऐसा करते भी हैं। इसीलिए हम अंदर अंदर घुटते रहते हैं किन्तु अपनी मनोव्यथा किसी से साझा नहीं करते। यह घुटन हमें कई बार गहरे अवसाद में डाल देती है, तो कभी आत्महत्या तक करने को मजबूर कर देती है। लेकिन जीवन का शाश्वत सत्य तो यही है कि कुछ भी स्थायी नहीं होता। आपका दुःख और चिंताएं भी नहीं।

तो बेहतर है कि सबसे पहले तो यह स्वीकारिये की जीवन में कभी – कभी निराशा में डूब जाना भी सामान्य है। कभी कुछ उम्मीदों के पूरा होने में बहुत वक्त लगता है,तो कई बार उम्मीदें अधूरी भी रह जाती हैं।लेकिन जीवन नहीं रुकता।न रुकना चाहिए। यह चुनौतियां ही तो असली जीवन हैं।इनका सामना कीजिये, पल्ला मत झाड़िये। पीछा मत छुडाइये, बल्कि इसे भी आत्मविकास के एक अवसर के रूप में देखिए। सबसे बड़ी बात अपनी भावनाओं को छुपाइयें मत। अपनो से बात कीजिये, दोस्तों के साथ वक्त गुजारिये।स्वीकारिये कि आप हैं परेशान,इसमें काहे ही झिझक! मत लगाइये मुखौटा! निकाल दीजिये ग़ुबार! मन हल्का कीजिये। दिमाग स्वतः शांत हो जाएगा। अपनों का साथ हो तो कठिन वक्त भी सहजता से बीत जाता है, साथ ही आगे की राह भी दिखती है। समय की परिवर्तनशीलता ही शाश्वत सत्य है, इसे स्वीकारिये और यकीन कीजिये कि सब ठीक हो जाएगा।कई बार ईश्वर आपको वह नहीं देता जो आप चाहते हैं,बल्कि वह देता है जिसकी आपको वाकई में जरूरत है। अतः एक बार भावनाओं को परे रख इस नज़रिये से भी चुनौतियों को देखिए। कई बार समस्या में ही उसका हल छुपा होता है। चुनौतियों से भागें नहीं, नहीं तो कभी कुछ सीख ही नहीं पाएंगे।जीवन के प्रति, जीवन की चुनौतियों के प्रति, बदलाव के प्रति स्वीकार्य भाव रखिये,तभी आपका पूर्ण विकास सम्भव है।

डॉ.सुजाता मिश्र
सागर

3 COMMENTS

  1. बहुत बहुत धन्यवाद मैडम आपके लेख व्यक्ति को जीने की शक्ति प्रदान करने वाले होते,हमेशा कुछ नया सीखने को मिलता है ,आप बहुत ही सार्थक लेख लिखती है ,बहुत बहुत धन्यवाद मैडम आप के लिए ।

  2. अवसादग्रस्त व्यक्ति के लिए बहुत ही सुंदर लेख। बधाई डॉक्टर साहब।

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