काव्यभाषा : भारत माता -अजय कुमार यादव,प्रतापपुर

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“भारत माता “
(1)
आज भारत माता वीरों तुमको पुकार रही है,
दुश्मन की गोली आज तुमको ललकार रही है।।
इस मिट्टी की खुशबू अब तुमको पुकार रही है,
हे सिंहो सुनो भारत माता तुमको चीत्कार रही है।।
उठाओ अपने हथियार तुम भी दुश्मन का संहार करो,
रणभेदी की गूंज दुश्मन देश की सीमा के पार करो।
(2)
वसुंधरा आज फिर से तुमको पुकार रही है,
तुम आज फिर अपने पौरुष का जौहर दिखलाओ,
किस्साअपनी वीरता का तुम सच कर दिखलाओ
वीर हो तुम इस भूमि केअपना पौरुष दिखला दो,
दुश्मन को आज उसी के जमीन में दफना दो ।
आज भारत माता वीरों तुमको पुकार रही है,
दुश्मन की गोली आज तुमको ललकार रही है।।
(3)
अपने देश की देखो शान ना हरगिज़ जाने पाए,
चाहे भले ही अपनी जान क्यू ना चली जाए।
हमने हमेशा अपनी छाती पर गोली खाई है,
लड़ते लड़ते ही हमने वीरगति को पाई है।
वीरों ने यह धरती अपने खून पसीने से सींची है,
दुश्मन पर अब सबने अपनी भृकुटी खींची है।।
(4)
हमने तो साथ उसके दोस्ती का हाथ बढ़ाया था,
उसने हमारी पीठ पर धोखे से खंजर भोक दिया।
छोड़ दी है हमने संगत तुम जैसे मक्कारो की
हमने भी तैयारी कर ली है अब हथियारों की।
है दिली तमन्ना अब हम तुमको सबक सिखाएंगे।
हमारे भारत को अब हम आत्मनिर्भर बनाएंगे।।

अजय कुमार यादव
शिक्षक
शासकीय पूर्व मा.शाला जरही
प्रतापपुर,सूरजपुर,छत्तीसगढ़
मो=9977373081

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