काव्य भाषा : कभी हमको भी याद कर लो -अजय कुमार यादव,प्रतापपुर

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“कभी हमको भी याद कर लो”
(1)
ज़िन्दगी का नाम कभी, सुबह तो कभी शाम है
कभी फुरसत है तो ,कभी बस काम ही काम है।।
पास रहकर भी कुछ लोग बहुत दूर चले गए,
अब वे अपनी ही दुनिया में मशगूल हो गए।।
(2)
हर किस्सा बताते थे वे कभी मुझे अपना समझकर,
अब उनको कोई खास मिल गया है हमको भूलकर।।
नदियां अपना सफर करते हुए सागर में ही मिलती है,
आज भी हमारी आंखे सिर्फ उनका इंतजार करती है।।
(3)
किस्सा हमारे प्यार का उनके दिल में ही दफन हो गया,
ना जाने कहां हमारा प्यार किस गली में गुम हो गया।
सारी रात करवटें बदलते रहे हम हमको नींद ना आई।।
उनको याद करके हमारे आंखो से आंसू निकल आई।।
(4)
पहला प्यार ज़िन्दगी की उस उधार की नाव जैसी है
जिसमे सवार होने के बाद डूबने के मौके बढ़ जाते है।
कच्ची उम्र की शरारत एक मौके की तलाश करती है,
अफसोस यही शरारत उसको ज़िन्दगी भर रुलाती है।

रचनाकार,
अजय कुमार यादव
शिक्षक
शास.पूर्व मा.शाला जरही,प्रतापपुर,सूरजपुर

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