नागरिक पत्रकारिता:इटारसी में लॉक डाउन : जिम्मेदार कौन ? – विनोद कुशवाहा

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इटारसी में लॉक डाउन : जिम्मेदार कौन ?

कल दिन भर लॉक डाउन को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म रहा क्योंकि स्थानीय रेस्ट हाउस में इस संबंध में मीटिंग चल रही थी । तभी ” युवा प्रवर्तक ” के माध्यम से जानकारी मिली कि उपरोक्त बैठक में 15 जुलाई से 7 दिन का लॉक डाउन किये जाने का निर्णय लिया गया है । उसके बाद तो व्हाट्सएप पर अन्य ग्रुपों के माध्यम से भी लॉक डाउन की खबरें मिलने लगीं । इस समाचार के फैलने के पश्चात् तो बाजार में अफरा – तफरी का माहौल बन गया । लोग जरूरी सामान लेने के लिए बाजार की तरफ दौड़ने लगे । ये दौड़ – भाग आज भी शायद जारी रहे । ऐसे में सोशल डिस्टेनसिंग की परवाह कौन करता है । क्या एक बन्द कमरे में शहर के चार लोग मिलकर इटारसी के नागरिकों को घरों में हफ्ते भर के लिए लॉक कर सकते हैं ? आखिर ये चुनिंदा व्यापारी कौन हैं जो क्षेत्रीय विधायक तक को भ्रमित कर गलत फैसले लेने को बाध्य कर रहे हैं ? इनको जनहित में एवं व्यापारियों के हित में निर्णय लेने हेतु व्यापारियों ने अपना प्रतिनिधि चुना था । ये तो उल्टी गंगा ही बहाने लगे । यही वजह है कि उनके इस फैसले से ज्यादातर व्यापारी ही असहमत हैं । परिणामस्वरूप पूर्व विधानसभा अध्यक्ष तथा क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा एस डी एम सतीश राय के साथ आज फिर व्यापारियों की बैठक लेंगे । बैठक में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाहियों की तरफ भी ध्यान दिया जाए जिसके कारण ये स्थिति बनी । डॉ श्री श्यामाप्रसाद मुखर्जी अस्पताल के बहुचर्चित अधीक्षक डॉ ए के शिवानी क्षेत्रीय विधायक , पत्रकारों तथा जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार गलत जानकारी दे रहे हैं । जिसका परिणाम पूरे शहर को भुगतना पड़ रहा है । उनके तर्क देखिए – ‘ अस्पताल केम्पस में बिजली बाधित होने से अधिक टेस्ट नहीं हो सके ‘। क्या अधीक्षक की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था करे ? स्वास्थ्य विभाग के कतिपय अधिकारियों का हाल भी डॉ शिवानी जैसा ही है । ऐसे अधिकारियों एवं चिकित्सकों के विरुद्ध कोई सख्त कार्यवाही नहीं किये जाने से उनके हौंसले इतने बुलंद हैं कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब कोरोना के संक्रमण की समीक्षा करने ग्वालियर पहुंचे तो बैठक में आला अफसरों ने कोरोना से संबंधित गलत जानकारी देकर उन्हें भी ” मिस गाइड ” कर दिया । यहां तक कि सी एम को मौत और मरीजों की संख्या तक कम बताई गई और बेड भी अधिक बता दिए ।

तो लॉक डाउन इस समस्या का हल नहीं है । ज्यादा से ज्यादा संक्रमित क्षेत्र में आप इसे लागू कर सकते हैं । कुछ लोगों की सजा पूरे शहर को क्यों मिले । सजा तो अस्पताल अधीक्षक को उनकी लापरवाहियों के लिए मिलना चाहिए । उन्हें तत्काल हटाकर किसी काबिल व जिम्मेदार डॉक्टर को अधीक्षक जैसा महत्वपूर्ण पद सौंपा जाए । अन्यथा डॉ शिवानी के इस पद पर बने रहने से परिणाम और ज्यादा भयंकर होंगे ।

रोज कमाने – रोज खाने वाले फुटकर दुकानदारों , व्यापारियों , आम नागरिकों की तरफ से मैं फिर क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा से अनुरोध कर रहा हूं कि लॉक डाउन कोई हल नहीं है । माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो एक कदम बढ़कर सबसे ज्यादा संक्रमित जिले मुरैना तक के लोगों की लॉक डाउन की मांग को एक सिरे से खारिज कर दिया । जबकि वहां के लोग एक स्वर में कह रहे थे कि – ‘ लॉक डाउन बढ़ाया जाए ‘। सी एम ने उनसे स्पष्ट कहा कि – ” लॉक डाउन उपाय नहीं है । जांचें बढ़ाना जरूरी है ” । केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने तो यहां तक कहा कि – ” कोरोना के साथ जीना सीखना होगा ” । इसलिये बेहतर होगा कि आम नागरिक और व्यापारी बन्धु भी अपनी जिम्मेदारी समझें ।

– विनोद कुशवाहा .

7 COMMENTS

  1. आदरणीय मैं आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ साथ ही एक बात पर और ध्यानाकर्षण करना चाहूंगा वो यह कि किसी भी मरीज या उनके परिवार का यह अधिकार होता है कि वे इलाज किस पद्धति से या किस डॉक्टर से कराना चाहते हैं। मरीज को एलोपैथी से, होम्योपैथी से, आयुर्वेद से या नेचरोपैथी से अपने निर्णय के आधार पर इलाज करवाने की छूट होनी चाहिए। यदि सरकारी तंत्र द्वारा उन्हें किसी कैदी की तरह घरों से उठाकर सिर्फ एलोपैथी इलाज लेने को बाध्य किया जायेगा तो शंका होना लाजमी है कि ड्रग माफिया सक्रिय है।

    • आभार स्नेही सौरव । मरीज को अधिकार तो है लेकिन फिलहाल एलोपैथी ही कारगर साबित हो रही है और इटारसी में सरकारी अस्पताल की दुर्दशा से सब परिचित हैं परंतु कहीं कोई विरोध नहीं । अफ़सोस इस बात का है कि मरीज वहीं जाने के लिए बाध्य है । विवश है । मजबूर है ।

  2. जनहित में बातें आपने लिखी है
    सही बातें लिखी हैं
    प्योर सच लिखा है
    ऐसा ही होना चाहिए
    जिस एरिया में तकलीफ है वही एरिया बंद होना चाहिए

  3. कुशवाहा जी
    सादरनमन
    इटारसी शहर में पुनः साप्ताहिक लॉकडाउन का लगना कोरोना के फ़ैलने की समस्या का हल नही है बमुश्किल व्यापारी और आम आदमी की जिंदगी पटरी पर लौटना शुरू ही हुई है और फिर लॉक डाउन नो दिन चले अढाई कोस कीस्थिति ही है।
    स्वास्थ्य विभाग ज़्यादा से ज्यादा कोरोना की जांच पर ध्यान दे,आम आदमी को मास्क पहनने को प्रेरित करे तथा ना पहनने वालो को आर्थिक दंड दिया जाये,जिस एरिया में मरीज है उसी क्षेत्र को पूरी तरह बंद किया जाए,नाकि शहर को।
    कुशवाहा जी आपने आम आदमी की समस्याओं और प्रशासन की नाकामी को युवाप्रवर्तक के माध्यम से पेश किया.
    इसके लिए कोटि-कोटि साधुवाद🙏

  4. भैया सादर नमन
    आपने सही कदम उठाया है। बंद हल नहीं है। बंद से आर्थिक स्थिति खराब होती है। बचाव ही उपाय है। कोरोना की जब तक दबाएँ न बन जायें। तब तक सावधानी से जीवन की गाड़ी चलाना होगा। कोरोना के संग संग जीना होगा।
    जनहित आपकी सोच का हम बहुत सम्मान करते है।
    आपको साधुवाद करते है।

  5. प्रिय भाई लॉक डाउन इसलिए लगाना पड़ता है कि लोग अपनी जिम्मेदारी का पालन नहीं करते सरकार ने जो प्रोटोकॉल निर्धारित किया है उसकी धज्जियां उड़ने पर लॉकडाउन करना ही पड़ता है मुंबई में यही हुआ

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