काव्य भाषा : किसान – शंकर सिंह सिदार ,चिपरीकोना, जिला-महासमुन्द

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किसान
विधा – दोहा

(1)‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ मेहनती होता कृषक,
करता हरदम काम ।
खूब मेहनत वह करे,
करे नहीं आराम ।।

(2) रोज सुबह वह घूमता,
सिर पर पगड़ी मार ।
अन्न उगाकर वह बने ,
सबका पालनहार ।।

(3) नई- नई तकनीक से ,
खेती करे किसान ।
बढ़ते पैदावार से ,
बनता कृषक महान ।।

(4) कहलाता मित्रों वहीं,
धरती का भगवान ।
हाथ बढ़ाता देश के ,
उन्नति हेतु किसान ।।

शंकर सिंह सिदार
चिपरीकोना, भंवरपुर “बसना”
जिला-महासमुन्द ( छ. ग.)

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