काव्यभाषा : ब्रजभाषा में पद – सत्येंद्र सिंह ,पुणे

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पद

राधे श्री चरनन शरण में लीजै।
निज दर्शन हर जग नारि में दीजै।।

आतम तत्व तुम्हीं हो राधे, परमातम है कान्हा।
यह परतीति हृदय मम कीजै,करूं युगल प्रणामा।।

काम क्रोध मद मत्सर जो हो, जारि देउ तुम राधे।
राधे श्याम दोउ हृदय बिराजो क्षमा करहु अपराधे।।

जग बौरानौ भयौ आज कोरोना सबकूं मारे डारै ।
काल कूट सम भय बिराजौ जग जीवित ही मारै।।

करि कृपा कटाक्ष श्री राधे, हर लीजे कष्ट हमारे।
मैं जनम जनम जपूं हमेशा, जय श्री राधे राधे।।

सत्येंद्र सिंह
पुणे

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