काव्य भाषा : मुस्कान – डा.साधना अग्रवाल

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मुस्कान

मुस्कान कैसी हो?
प्रश्न ही उत्तर बन
मीठी सरल मुस्कान,
मस्ती में झूम नाचकर
दर्द में हर्ष बयां कर गई,
क्योंकि वो पराई हो गई।
मन मौजी मुस्कान,
नहीं चाहिये कुछ, सब है,
दबी जुबां से जता गई,
क्योंकि वो पराई हो गई।
मगन सहज मुस्कान
प्यारी हूँ कहकर
आँसू मेरे सुखा गई,
क्योंकि वो पराई हो गई।

– डा.साधना अग्रवाल

2 COMMENTS

  1. ह्रदय स्पर्शी रचना
    सुंदर

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