काव्यभाषा : व्यर्थ नहीं करते मनमानी – गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ,जांजगीर

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सजल

व्यर्थ नहीं करते मनमानी
सब की होती अलग कहानी

करो संरक्षण सब जीवों का
धरती ओढ़े चूनर धानी

बात-बात पर नहीं बिगड़ना
बंद करो सारी शैतानी

घरों पर अपने रहो सुरक्षित
सफल होवें उनकी कुर्बानी

देश सुलगता है संकट में
घर में रह लो दिलबर जानी

सच कहते अफवाहें रोको
बनो हमेशा एक जुबानी

आओ मिलकर देश बचाएं
कर लें अपनी सफल जवानी

गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी
जांजगीर
(छ.ग.)

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