काव्य भाषा : करता तुमसे प्यार रहा -शशि भूषण मिश्र ‘गुंजन’, चेन्नई

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ग़ज़ल

हृदय थाल में प्रेम सजाकर मैं करता मनुहार रहा,
मन की कलियाँ पुष्प बनाकर करता तुमसे प्यार रहा,

उधर जरुरत से तुम आती जाती रही पास मेरे,
इधर तुम्हारी खुशियों का सिंचित करता संसार रहा,

हर दिन हो मधुमास तुम्हारा यही कामना रही सदा,
तेरी हर मुस्कान पे अर्पित गज़ल,गीत, उद्गार रहा,

दुनियां की है राह कठिन संघर्ष बहुत है जीवन में,
कभी हौसला डिगे न तेरा खड़ा अडिग आधार रहा,

जीवन में संतुलन जरूरी रहता सदा हृदय मन का,
तुम्हें करूँ उत्साहित निश दिन मेरा कारोबार रहा,

भाग्य साथ देता है उनका जो कर्तव्य परायण हैं,
सबकुछ है श्रमसाध्य यही मेरे जीवन का सार रहा,

प्रेम स्वयं रहता खुश देकर यही सदा से रीति रही,
जो कुछ बची शेष अब साँसें मुझपर तेरा उधार रहा,

मुरझाए उदास फूलों को देख दुःखी मन हो ‘गुंजन’,
तन,मन,धन से इन्हें हँसाना यही परम उध्दार रहा,

-शशि भूषण मिश्र ‘गुंजन’
चेन्नई तमिलनाडु

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  1. आदरणीय देवेन्द्र सोनी जी संपादक युवा प्रवर्तक ई मैगजीन को सहृदय धन्यवाद। आपने मेरी रचना को अपनी पत्रिका में स्थान देकर अनुग्रहित किया है।

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