काव्य भाषा : ख़ूबसूरत – कुन्ना चौधरी, जयपुर

ख़ूबसूरत

प्रेमी के लिये प्रेमिका का यौवन खूबसूरत,
ममता के लिये लाल का जोबन ख़ूबसूरत ,

भूखे को लगे भोजन की थाली ख़ूबसूरत ,
लत हो नशे की तो मय की प्याली ख़ूबसूरत ,

अंधे के लिये फूलों की महक भी ख़ूबसूरत ,
बहरे के लिये जलधि की लहर भी ख़ूबसूरत ,

श्याम तन पर हो सौम्य मन होता ख़ूबसूरत ,
विकलांग के लिये कृत्रिम अंग होता ख़ूबसूरत ,

भँवरों को नहीं लगते नक़ली रंगीन फूल ख़ूबसूरत,
जैसे बेजान मोम के पुतले नहीं हो सकते ख़ूबसूरत,

सबको उनकी उपयोगिता और गुण बनाते ख़ूबसूरत ,
खोखले वादे और इरादे नहीं माने जाते ख़ूबसूरत ,

जिसकी होती भावना जैसी धरती लगे वैसी ख़ूबसूरत,
शुद्ध मन कर्म वचन से बन सकते हम भी ख़ूबसूरत ।

कुन्ना चौधरी
जयपुर

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5 COMMENTS

  1. बहुत बहुत शुक्रिया
    और आपके चैनल को हमारी शुभकामनाएँ 🥳🙏🥳

  2. नमस्कार….बहुत बहुत शुक्रिया
    और आपके चैनल को हमारी शुभकामनाएँ 🥳🙏🥳

  3. बहुत खूबसूरत रचना
    शब्द की विस्तृत व्याख्या
    उसके उपमेय-उपमान बहुत सटीक हैं।

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