कविता : कटघरा – पूनम गुप्ता, मसूरी

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कटघरा

वो जो हमसे सवाल करते हैं,
हमारी बातें हमारे किस्से
पीठ पीछे ,सरेआम
कहते सुनते हैं,
वह जो खुद
मन मस्त जीवन जीते हैं,
मदिरापान, अचार विहार
खुलेआम कर बहकते हैं…
कटघरे में खड़ा हमें वो
सुबह शाम करते हैं..
हम भी …
उनसे आज
यह सवाल करते हैं..
क्या रिश्ता है ..
आपका हमसे??
जो आप हमसे ..
बेमतलब सवाल करते हैं।

पूनम गुप्ता
मसूरी

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